त्रिवेणी संगम स्थित गजेन्द्रमोक्ष तीर्थ पर विधि-विधान से दिया निमंत्रण, 17 से 20 नवंबर तक होगा 16108 श्री तुलसी-शालिग्रामजी विवाह महामहोत्सव
भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी।
स्मार्ट हलचल|धर्म एवं वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में इस बार कार्तिक मास की धार्मिक आभा कुछ अलग ही नजर आएगी। भगवान विष्णु के स्वरूप माने जाने वाले शालिग्रामजी और माता तुलसी के दिव्य विवाह का साक्षी बनने के लिए देशभर से श्रद्धालु भीलवाड़ा की ओर रुख करेंगे। आगामी 17 से 20 नवंबर 2026 तक आयोजित होने जा रहे 16108 श्री तुलसी शालिग्रामजी विवाह महामहोत्सव को लेकर तैयारियां अब केवल भीलवाड़ा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक कड़ियां नेपाल की पवित्र भूमि तक जुड़ गई हैं।
महामहोत्सव को लेकर आयोजन समिति की विशेष टीम नेपाल पहुंची और नारायणी नदी के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित गजेन्द्रमोक्ष तीर्थ में भगवान श्रीहरि के स्वरूप मानी जाने वाली पावन शालिग्राम शिलाओं को भीलवाड़ा पधारने का विधिवत निमंत्रण दिया। धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के साथ अर्पित किया गया यह निमंत्रण अपने आप में भारत और नेपाल की साझा सनातन आस्था का प्रतीक बन गया।
जहां नारायणी की धारा में बहती है भक्ति, वहीं से आया विवाह का निमंत्रण
आयोजन संयोजक एसएन गग्गड़ ने बताया कि समिति के सदस्यों ने नेपाल पहुंचकर त्रिवेणी संगम स्थित गजेन्द्रमोक्ष तीर्थ में पूजा-अर्चना की। पवित्र वातावरण में धार्मिक परंपराओं के अनुसार शालिग्रामजी को भीलवाड़ा में आयोजित होने वाले विराट विवाह महामहोत्सव में पधारने का निमंत्रण अर्पित किया गया।
नारायणी नदी के तट पर स्थित यह तीर्थ श्रद्धा और अध्यात्म की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। ऐसे पावन स्थान से शालिग्रामजी को आमंत्रित करना आयोजन की आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
कथा व्यास श्विष्णुश्रीश् कृष्णतनय महाराज ने बताया कि नेपाल स्थित तीर्थ पर संपूर्ण विधि-विधान, पूजन-अर्चन एवं धार्मिक परंपराओं के साथ निमंत्रण अर्पित किया गया। भगवान श्रीहरि के स्वरूप माने जाने वाले शालिग्रामजी से भीलवाड़ा पधारकर तुलसीजी के साथ होने वाले इस दिव्य विवाह उत्सव को अपनी उपस्थिति से पावन करने की प्रार्थना की गई।
तुलसी और शालिग्राम भक्ति, समर्पण और गृहस्थ धर्म का संदेश
सनातन परंपरा में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि देवी स्वरूप माना गया है। घर-आंगन में तुलसी की उपस्थिति को पवित्रता, सकारात्मकता और धार्मिक आस्था से जोड़ा जाता है। वहीं शालिग्राम भगवान विष्णु का प्रतीक स्वरूप माने जाते हैं। तुलसी-शालिग्राम विवाह को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र धार्मिक अवसर माना गया है।
यही कारण है कि कार्तिक मास में होने वाले तुलसी विवाह का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे भक्ति और वैवाहिक संस्कार के साथ-साथ धर्म, समर्पण, सात्विक जीवन और परिवार व्यवस्था के आध्यात्मिक संदेश से भी जोड़ा जाता है।
इसी धार्मिक भावभूमि पर भीलवाड़ा में 16108 तुलसी-शालिग्रामजी विवाह का आयोजन आकार ले रहा है। आयोजन समिति का प्रयास है कि महोत्सव केवल विशाल संख्या का धार्मिक आयोजन न रहकर श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, संस्कार और अध्यात्म का अनुभव बने।
भारत-नेपाल की सनातन परंपराओं का आध्यात्मिक मिलन
आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा कि नेपाल से शालिग्रामजी को निमंत्रण देना भारत और नेपाल के बीच सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आत्मीयता को भी अभिव्यक्त करता है। दोनों देशों की सीमाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सनातन परंपराओं, तीर्थों और धार्मिक आस्थाओं ने सदैव दोनों को जोड़े रखा है।
नेपाल की पावन भूमि से शालिग्राम शिलाओं का भीलवाड़ा आगमन इसी आध्यात्मिक संबंध को और मजबूत करेगा। यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष अनुभूति का कारण बनेगा।
देशभर से पहुंचेंगे श्रद्धालु
प्रमुख आचार्य योगेंद्र शर्मा ने बताया कि 17 से 20 नवंबर तक होने वाले महामहोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारियां चल रही हैं। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाओं को लेकर लगातार बैठकें एवं तैयारियां की जा रही हैं।
समिति का संकल्प है कि भगवान श्री तुलसीजी एवं श्री शालिग्रामजी के विराट विवाह उत्सव को श्रद्धा, सेवा और सनातन परंपराओं के अनुरूप भव्य स्वरूप दिया जाए। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा, व्यवस्था और सेवा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
आस्था के इस महापर्व से जुड़ी बड़ी तैयारी
महोत्सव की तैयारियों में आयोजन समिति के संरक्षक विनीत अग्रवाल बाबाधाम, मनोज गोटे वाले, अध्यक्ष राधेश्याम चेचाणी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष छगनलाल जैन, एडवोकेट राजेंद्र कचैलिया, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण मूंदड़ा, सचिव देवेंद्र सोमानी, सह संयोजक दिनेश विजयवर्गीय एवं व्यवस्था प्रमुख राकेश सुखवाल सहित पदाधिकारी सक्रिय हैं।
इसके अलावा परमेश्वर पाराशर, सुनील नुवाल, रजनीकांत आचार्य, मंजू पोखरना, अलका जोशी, कौशल्या भाटिया, संगठन मंत्री अनिल पारीक, अंकित सोमानी, रामचंद्र मूंदड़ा, कैलाश काबरा, कार्यालय प्रभारी नंदकिशोर जोशी, दुर्गाशंकर जोशी, जीएल गुप्ता, जगदीश वैष्णव, केशव पुरोहित, गोविंद भाटिया, प्रेमप्रकाश पुरोहित, संजय प्रताप सिंह पारीक, देवीलाल तोषनीवाल, बालमुकुंद पारीक, रमेशचंद्र त्रिपाठी, मुकेश जोशी त्रिवेणी, श्याम झवर, वरिष्ठ पत्रकार हनुमान अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं पुरुष कार्यकर्ता आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
नेपाल के त्रिवेणी संगम से भीलवाड़ा के तुलसी-शालिग्राम विवाह तक की यह धार्मिक यात्रा केवल एक निमंत्रण की कहानी नहीं, बल्कि उस सनातन भाव का प्रतीक है जिसमें तीर्थ, परंपरा, आस्था और भक्ति सीमाओं से परे एक-दूसरे से जुड़ते हैं। अब श्रद्धालुओं की निगाहें नवंबर में होने वाले उस ऐतिहासिक अवसर पर टिकी हैं, जब भीलवाड़ा की धरती पर हजारों भक्तों की उपस्थिति में तुलसी और शालिग्रामजी के दिव्य विवाह का आध्यात्मिक वातावरण साकार होगा।