(हरिप्रसाद शर्मा)
सोजत / स्मार्ट हलचल|गीता जयन्ती के अवसर पर माधव शास्त्री ने कहा कि गीता में श्रीकृष्ण ने बताया कि सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलने पर बल दिया और कहा कि सर्वधर्मान् परिशुद्ध्य मामेकं शरणं व्रज सभी धर्मों को अपने आचरण से खुद को पवित्र करते हुए अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
श्रीकृष्ण ने बताया कि व्यक्ति अपने नित्य आचरण में तन शुद्धि, मन शुद्धि , वाणी शुद्धि, धृति शुद्धि,आहार शुद्धि और बुद्धि शुद्धि पर विशेष ध्यान दे मात्र ऐसा करने पर वह अपने माने जाने वाले धर्म-कर्म में भी पवित्रता का सञ्चार करने में समर्थ हो सम्पूर्ण भौतिक जगत के लिए कल्याण कारी हो सकता है। आहार शुद्धि सबका मूल रूप है अतः आहार में सात्विक भोजन प्रभावी है अतः अपना भोजन ताज़ा और शाकाहारी के साथ ऋतभुक्,हितभुक्,मितभुक् अर्थात उपवास करें, अपने शरीर के हित के लिए ही खायें और थोड़ा खायें इससे शरीर में सत्त्व गुण बढ़ता है जिसके कारण सभी दु:खों की निवृत्ति हो अपने कर्म में कौशल प्रकट हो सकता है।













