:- आस्था, भक्ति और विश्वास का बना अद्भुत संगम, 47.43 लाख रुपये की भेंट राशि हुई प्राप्त
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल।मेवाड़ की प्रसिद्ध आस्था नगरी कोटड़ी स्थित श्री चारभुजानाथ मंदिर में सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। सोमवार को प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राजस्थान के विभिन्न जिलों सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान श्रीचारभुजानाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर, मुख्य मार्ग एवं बाजार भक्तों की भीड़ से गुलजार रहे। सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रही। सुबह मंगला आरती के साथ शुरू हुई दर्शन व्यवस्था देर रात शयन आरती तक लगातार चलती रही। श्रद्धालु घंटों कतारों में खड़े रहकर भगवान के दर्शन करते नजर आए लेकिन किसी के उत्साह और श्रद्धा में कमी दिखाई नहीं दी। सोमवती अमावस्या पर उमड़ी विशाल भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रीचारभुजानाथ धाम केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या भगवान के प्रति लोगों के गहरे विश्वास और मंदिर की बढ़ती धार्मिक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। पूरे दिन कोटड़ी कस्बा भक्ति, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह के रंग में रंगा रहा तथा भगवान श्री चारभुजानाथ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान बना रहा।
उमस व तपती धूप भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं की आस्था
भीषण गर्मी और तेज धूप व उमस के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में भक्त नंगे पांव पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे। कई श्रद्धालु परिवार सहित गांवों से पदयात्रा करते हुए कोटड़ी पहुंचे और भगवान श्रीचारभुजानाथ के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का कहना था कि श्रीचारभुजानाथ के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ही उन्हें हर परिस्थिति में यहां आने की प्रेरणा देती है। मंदिर मार्ग पर दिनभर जय श्री चारभुजानाथ के जयकारे गूंजते रहे। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
विशेष अभिषेक एवं मनमोहक श्रृंगार ने मोहा मन
सोमवती अमावस्या पर भगवान श्री चारभुजानाथ का विशेष अभिषेक वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न हुआ। भगवान को पंचामृत, दूध, दही, घृत, शहद एवं सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराया गया। इसके पश्चात ठाकुरजी को विशेष स्वर्णजड़ित पोशाक धारण कराकर आकर्षक एवं भव्य श्रृंगार किया गया। श्रृंगारित प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। महाआरती के समय मंदिर परिसर घंटानाद, शंखध्वनि एवं जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भगवान की स्तुति की।
श्रद्धालुओं ने अर्पित किए 47.43 लाख रुपये व आभूषण
श्रीचारभुजा मंदिर ट्रस्ट कोटड़ी द्वारा ज्येष्ठ कृष्ण सोमवती अमावस्या के अवसर पर मंदिर में प्राप्त भेंट राशि एवं अन्य आय का विवरण जारी किया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया ने बताया कि श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से मंदिर को कुल 47 लाख 43 हजार 389 रुपये की राशि प्राप्त हुई। साथ ही मंदिर में रखे भेंट पात्र से 34 लाख 21 हजार 2 रुपये, रसीदों के माध्यम से 5 लाख 5 हजार 767 रुपये तथा ऑनलाइन से 8 लाख 16 हजार 620 रुपये प्राप्त हुए। इन सभी मदों को मिलाकर कुल आय 47 लाख 43 हजार 389 रुपये रही। इसके अतिरिक्त मंदिर को श्रद्धालुओं द्वारा 2 किलो 94 ग्राम चांदी तथा 0.340 मिलीग्राम सोना भी भेंट स्वरूप प्राप्त हुआ। मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं एवं दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर विकास, धार्मिक आयोजनों एवं जनहित के कार्यों में नियमानुसार किया जाएगा। मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था एवं सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे धार्मिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है।
धान अर्पित करने की परंपरा निभाने पहुंचे श्रद्धालु
सोमवती अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने साथ धान, नारियल, प्रसाद एवं अगरबत्ती लेकर मंदिर पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए भक्तों ने परंपरा के अनुसार भगवान के चरणों में धान अर्पित कर अच्छी वर्षा, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में महिलाओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति एवं मंगल कामना की। दिनभर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। क्षेत्रीय भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। भगवान पर आधारित भजनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट, स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवकों द्वारा विशेष प्रबंध किए गए। दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई। पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता एवं सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था रखी गई। पुलिसकर्मियों एवं स्वयंसेवकों ने पूरे दिन व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाजसेवी संस्थाओं द्वारा भी श्रद्धालुओं के लिए गलातर करने के लिए शीतल पेयजल एवं विश्राम की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सोमवती अमावस्या पर उमड़ी भीड़ का असर कस्बे के व्यापार पर भी दिखाई दिया। प्रसाद, पूजन सामग्री, कपड़ा, आभूषण, जूते-चप्पल एवं अन्य दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ रही। व्यापारियों ने बताया कि धार्मिक आयोजनों से स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलती है।
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