हृदय विदारक दृश्य पांच दिन बाद देख ग्रामीण रह गए सन्न
(शीतल निर्भीक ब्यूरो)
लखनऊ। स्मार्ट हलचल|उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रिश्तों की सबसे डरावनी तस्वीर तब सामने आई, जब जिस दामाद को लोग अपनी बेटी का दुखी पति समझकर ढांढस बंधा रहे थे, वही उसकी हत्या का गुनहगार निकला। पत्नी को मौत के घाट उतारने के बाद आरोपी बेखौफ ससुराल पहुंचा, सम्मान पाया, खातिरदारी कराई और गांव भर में पत्नी की तलाश का नाटक करता रहा। किसी को जरा भी अंदेशा नहीं था कि यह सब एक खौफनाक साजिश का हिस्सा है।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि बेलघाट थाना क्षेत्र के एक गांव में रविवार देर रात पति- पत्नी के बीच कहासुनी हुई। बात इतनी बढ़ी कि पति ने सोती हुई 25 वर्षीय पत्नी का गला दबाकर उसकी जान ले ली। हत्या के बाद उसने शव के हाथ-पैर बांधे और घर के पीछे छह फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसे दफना दिया। इसके बाद उसने ऐसा ढोंग रचा, जिसने पूरे गांव को भ्रम में डाल दिया।
हत्या के बाद आरोपी सीधे गोला क्षेत्र स्थित ससुराल पहुंचा। वहां खुद को परेशान पति बताकर पत्नी की खोज-खबर लेने का नाटक किया। ससुराल वालों ने उसे मीठा खिलाया, चाय पिलाई और दिलासा दिया। विवाहिता की छोटी बहन, सहेलियां और पिता सभी उसे दुखी दामाद समझते रहे। गांव वाले भी यही मान बैठे कि पत्नी कहीं नाराज होकर चली गई होगी।
आरोपी चालाकी से लोगों के बीच पत्नी के चरित्र पर शक जताता रहा। कहता रहा कि वह अनजान लोगों से बात करती थी और मोबाइल लेकर कहीं चली गई है। गांव की महिलाओं ने उसे समझाया, लेकिन किसी को हत्या का अहसास नहीं हुआ।
दरअसल, महिला के बार-बार झगड़े के बाद घर छोड़कर जाने की आदत ही आरोपी के लिए ढाल बन गई। ग्रामीणों ने सोचा, इस बार भी कुछ दिनों में वह लौट आएगी। सर्दी की रातों का सन्नाटा, परिवार की मौजूदगी और पुरानी आदतों ने शक को दबा दिया।
घटना के चार दिन बाद घर के पीछे ताजा खुदाई दिखी तो परिवार के कुछ लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। बात मां तक पहुंची, फिर पुलिस को सूचना दी गई। जांच के बाद जब गड्ढा खोदा गया तो सच्चाई ने सबको झकझोर दिया। शव निकलते ही गांव में मातम और सन्नाटा पसर गया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि शक और झगड़े उसकी पत्नी की मौत की वजह बने।प्रेम विवाह से शुरू हुआ रिश्ता अविश्वास में बदल गया और अंत कत्ल पर आकर रुका।
मृतका का जीवन शुरू से संघर्षों में बीता था। मां पहले ही गुजर चुकी थी, पिता मजदूरी कर परिवार पालते थे। जिस दिन हत्या की खबर आई, उसी दिन उसका भाई बहन के ससुराल खिचड़ी लेकर जाने की तैयारी कर रहा था।यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि भरोसे की हत्या है। जिस दामाद को बेटी का सहारा समझा गया, वही उसका कातिल निकला और पांच दिन तक पूरे गांव को अंधेरे में रखता


