संजय चौरसिया
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का अलौकिक समापन: पूर्णाहुति, महाप्रसादी और भजन-रस में डूबा हरनावदाशाहजी, उमड़ा श्रद्धालुओं का महासैलाब
समस्त ग्रामवासीयो के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का धूमधाम से हुआ समापन
हरनावदाशाहजी।स्मार्ट हलचल| कस्बे का वातावरण गुरुवार को पूरी तरह आध्यात्मिक उल्लास में डूब गया, जब मेला मैदान स्थित बाग वाले हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का भव्य पूर्णाहुति व महाप्रसादी के साथ दिव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस होने से सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया और देखते ही देखते पूरा परिसर खचाखच भर गया। दूरदराज़ के गांवों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर इस आध्यात्मिक पर्व का हिस्सा बने।
रामानंद सनकादिक संत आश्रम के कथावाचक महामंडलेश्वर अभिराम दास त्यागी के सानिध्य में कथा के अंतिम दिन भक्ति के गूढ़ रहस्यों, आत्मिक शांति और जीवन-साधना के उच्चतम सिद्धांतों का अद्भुत, हृदयस्पर्शी वर्णन हुआ। गुरुदेव के मधुर, प्रभावी और चिंतनयोग्य उपदेशों ने हजारों श्रद्धालुओं को गहन भक्ति-रस में डूबो दिया। कथा के दौरान उठती जय-जयकार और भजनों की मधुर स्वर लहरियों से पूरा पंडाल दिव्य ऊर्जा से कम्पायमान हो उठा।
मुख्य यजमान परमानन्द नागर रहे, जबकि सातवें दिवस की पूजा में
कमल नागर, दुर्गाप्रसाद नागर, अनिल शर्मा, मुकेश शर्मा, महेन्द्र सोनी, राहुल सोनी, मोहनलाल शर्मा, धनराज मीणा और मुरलीधर शर्मा ने यजमान-सेवा निभाई। पूजा-अर्चना का दृश्य अत्यंत श्रद्धामय रहा।
महाप्रसादी के दौरान भक्तों की लंबी कतारें पंडाल से बाहर तक फैली रहीं। सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने पूर्ण व्यवस्था के साथ सबको प्रसाद ग्रहण करवाया। राधे-कृष्ण नवयुवक मंडल नई बस्ती ने प्रसादी वितरण और अनुशासन बनाये रखने में विशेष योगदान दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने स्नेह, भक्ति और सामूहिकता की भावना से ओत-प्रोत इस महाप्रसादी का लाभ लिया। सात दिवसीय कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति बढ़ती रही। चतुर्थ दिवस कृष्ण जन्मोत्सव की में पूरे पंडाल में उल्लास का ज्वार उमड़ पड़ा। राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी, सुंदर सजावट, दीप प्रकाश और भजनों की गूंज ने वातावरण को पूर्णतः दिव्य बना दिया। यज्ञ-हवन, प्रेरणादायी प्रवचन और भजन संध्या जैसे कार्यक्रमों ने भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। बुधवार की भजन संध्या में भी बड़ी संख्या में भक्त देर रात तक जुड़े रहे। आयोजन समिति ने कहा कि यह कथा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र में सामाजिक एकता, आध्यात्मिक चेतना, सदाचार और मानवता के संदेश का प्रतीक बन गया। समापन के क्षणों में जब ‘जय श्रीकृष्ण’ के सामूहिक जयघोष गूंजे, तो पूरा क्षेत्र भक्तिरस में डूब गया।
इसी दौरान कस्बे के अकलेरा मार्ग स्थित रामानंद सनकादिक संत आश्रय पर निर्मित हो रहे विशाल राम मंदिर के लिए भी श्रद्धालुओं व दानदाताओं ने उदारता से सहयोग प्रदान किया। समिति ने बताया कि मंदिर निर्माण जनसहयोग से तीव्र गति पकड़ चुका है। कार्यक्रम के अंत में यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई कि सन 2027 में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जन सहयोग से अगली सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति, यजमानों, सेवकों, दानदाताओं और पूरे कस्बे ने कथा के सफल आयोजन पर एक-दूसरे के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।













