आखिर प्रशासन जनहित के मुद्दों को लेकर क्यों हैं, निष्क्रिय
लाखेरी – स्मार्ट हलचल|कस्बा इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से कराह रहा है। शुक्रवार को हालात उस वक्त भयावह हो गए, जब शहर में आवारा कुत्तों ने अचानक लोगों पर हमला बोल दिया। इस खौफनाक घटनाक्रम में करीब 50 लोग घायल हो गए, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग भी शामिल हैं।
घटनाओं की सूचना मिलते ही पूरे शहर में सनसनी फैल गई। घायल लोग चीखते-चिल्लाते हुए इधर-उधर भागते नजर आए। स्थानीय लोगों और परिजनों ने तत्काल घायलों को लाखेरी अस्पताल पहुंचाया, जहां एक के बाद एक मरीजों के पहुंचने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार उपचार में जुटी रही और घायलों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन सहित जरूरी चिकित्सा दी जा रही है। खबर मिलते ही नायब तहसीलदार अस्पताल पहुंचे और हालातो का जाएजा लिया
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्तों के झुंड ने राह चलते लोगों को निशाना बनाया। कई लोगों को सड़कों पर दौड़ाकर काटा गया, जिससे लोगों में भय और गुस्से का माहौल है। शहरवासी घरों से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं, खासकर बच्चों को लेकर अभिभावकों में भारी चिंता देखी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन और नगर पालिका ने इस दिशा में कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया। कई बार शिकायतें देने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी कराने और शहर को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है
क्या प्रशासन इस बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेगा?
क्या लाखेरी के लोगों को इस आतंक से राहत मिल पाएगी?
या फिर आमजन यूं ही हर दिन डर के साए में जीने को मजबूर रहेगा?
फिलहाल, लाखेरी में दहशत का माहौल है और लोग प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
