सिंबल पर संग्राम, कांग्रेस की गुटबाजी आई सामने!

मेवाड़ा का पलटवार—‘समय पर सिंबल नहीं दे पाए, अब भाजपा और प्रशासन पर ठीकरा क्यों?’

भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|नगर निगम चुनाव में सिंबल को लेकर मचे सियासी घमासान ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि समय पर पार्टी सिंबल जमा नहीं कर पाना कांग्रेस की अपनी संगठनात्मक चूक है, जिसका ठीकरा अब भाजपा और निष्पक्ष प्रशासन पर फोड़ा जा रहा है।
मेवाड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी नियम और समय-सीमा सभी राजनीतिक दलों के लिए समान होती है। यदि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी निर्धारित समय में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष सिंबल जमा नहीं करा पाए तो इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना समझ से परे है। निर्वाचन अधिकारी ने नियमों के अनुसार निर्णय लिया है।
‘पहले अपने प्रत्याशियों को जवाब दे कांग्रेस’
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को भाजपा पर आरोप लगाने से पहले उन वार्डों के प्रत्याशियों को जवाब देना चाहिए, जिनके सिंबल समय पर जमा नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि अंतिम समय तक टिकट और प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस में चली खींचतान का असर अब चुनावी मैदान में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी आंतरिक गुटबाजी और तालमेल के अभाव को छिपाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। धरना-प्रदर्शन करने से चुनावी नियम नहीं बदल सकते।
‘अपनी गलती को लोकतंत्र की हत्या बताना हास्यास्पद’
मेवाड़ा ने कहा कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक विफलता को स्वीकार करने के बजाय उसे लोकतंत्र से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि नियमों के पालन में हुई चूक को ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताना जनता को भ्रमित करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के आरोप उनकी हताशा और बौखलाहट को दर्शाते हैं। भीलवाड़ा की जनता कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और गुटीय राजनीति से परिचित है। अब कांग्रेस को अपनी गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने के बजाय अपने संगठन में जवाबदेही तय करनी चाहिए।
भाजपा ने प्रशासन का किया बचाव
मेवाड़ा ने कहा कि भाजपा निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया में विश्वास करती है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अधिकारी नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं और किसी राजनीतिक दल के दबाव में चुनाव प्रक्रिया नहीं चल सकती।
उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक हंगामे से नियम नहीं बदलेंगे। कांग्रेस अपनी गुटबाजी और संगठनात्मक चूक का जवाब दे और भाजपा तथा निष्पक्ष प्रशासन पर बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करे।
सिंबल विवाद ने नगर निगम चुनाव की सियासत को और गरमा दिया है। अब कांग्रेस के आरोपों और भाजपा के पलटवार के बीच असली लड़ाई चुनावी मैदान के साथ-साथ दोनों दलों के संगठनात्मक अनुशासन की भी बन गई है।