आग लगे तो मोबाइल नहीं, पहले जान बचाएं… हर छात्र को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग जरूरी

कोटा

आईबीसी के स्थापना दिवस, वार्षिक बैठक, एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग एवं नेशनल टेक्निकल सेमिनार

फायर एंड सेफ्टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जयपुर चेप्टर चेयरमैन गणपत चौधरी बोले- कोटा आने वाले विद्यार्थियों को हॉस्टल में प्रवेश के साथ ही सिखाएं आग से बचाव के तरीके

कोटा, 6 सितम्बर। स्मार्ट हलचल|कोटा में देशभर से आने वाले हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर फायर सेफ्टी विशेषज्ञ ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। फायर एंड सेफ्टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जयपुर चेप्टर के चेयरमैन गणपत चौधरी ने कहा कि कोटा आने वाले विद्यार्थियों को हॉस्टल, पीजी या कोचिंग संस्थान में प्रवेश के समय ही फायर सेफ्टी की बेसिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। आग लगने की स्थिति में वीडियो बनाने के बजाय अपनी और दूसरों की जान बचाने की समझ जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर स्कूल, कोचिंग संस्थान, कॉलेज और हॉस्टल में विद्यार्थियों को फायर एक्सटिंग्विशर सहित अन्य अग्निशमन उपकरण चलाने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
यह बात उन्होंने इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस (आईबीसी) के कोटा लोकल सेन्टर की ओर से श्रीनाथपुरम स्थित श्रीराम दिव्य वाटिका में आयोजित आईबीसी के स्थापना दिवस, वार्षिक बैठक, एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग एवं नेशनल टेक्निकल सेमिनार में कीनोट स्पीकर के रूप में अग्नि सुरक्षा पर जागरूकता व्याख्यान देते हुए कही। कार्यक्रम में निर्माण एवं इंजीनियरिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने फायर सेफ्टी सहित आधुनिक निर्माण तकनीक और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर मंथन किया।
आईबीसी कोटा लोकल सेन्टर के चेयरमैन इंजीनियर हेमन्त कुमार शर्मा एवं सचिव इंजीनियर मनीष जैन ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीडब्ल्यूडी कोटा जोन के अतिरिक्त मुख्य अभियंता इंजीनियर अजय चौधरी रहे। अध्यक्षता डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर इंजीनियर अमजद अहमद ने की। विशिष्ट अतिथि केडीए के इंजीनियरिंग डायरेक्टर रविन्द्र प्रकाश माथुर रहे। मंच पर आईबीसी कोटा सेन्टर के कोषाध्यक्ष अशोक सनाढ्य, वाइस चेयरमैन सुनील गर्ग भी मौजूद रहे। इस दौरान कोटा सेन्टर की वार्षिक गतिविधियों (2025-26) के संग्रहण की पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

*सिर्फ सिस्टम लगाने से नहीं, चलाना भी आना चाहिए*
गणपत चौधरी ने कहा कि कोटा में बड़ी संख्या में विद्यार्थी हॉस्टल और पीजी में रहते हैं। ऐसे में भवनों में फायर सिस्टम लगा देना ही पर्याप्त नहीं है। वहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि आग लगने पर क्या करना है और किस उपकरण का इस्तेमाल कैसे करना है। विद्यार्थियों को घबराने के बजाय सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने, फायर एक्सटिंग्विशर, सिलेंडर और होज का उपयोग करने की जानकारी दी जानी चाहिए। आपात स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने से बड़ा नुकसान टाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आगजनी की घटनाओं के दौरान कई लोग मदद करने के बजाय मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगते हैं। ऐसी स्थिति में मोबाइल कैमरा नहीं, बल्कि बचाव की समझ और सही निर्णय किसी की जान बचा सकता है। फायर विभाग और गैर-लाभकारी संस्थाओं को मिलकर लगातार फायर सेफ्टी जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ‘सुरक्षित कोटा, सुरक्षित राजस्थान और सुरक्षित भारत’ के लिए आमजन को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है।

*भवन का उपयोग बदला तो बढ़ सकता है खतरा*
चौधरी ने कहा कि किसी भी भवन के निर्माण से पहले उसका उपयोग और क्षमता तय होना चाहिए। जिस उपयोग के लिए भवन का नक्शा स्वीकृत हुआ है, उसका इस्तेमाल उसी श्रेणी में होना चाहिए। बाद में उसी भवन में पीजी या अन्य गतिविधियां शुरू होने से क्षमता से अधिक भार पड़ सकता है और सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने भवनों में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और केबलिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने, फायर सिस्टम का एक्सेस आसान बनाने और उसकी नियमित मेंटेनेंस पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ ‘सेफ्टी फर्स्ट’ को प्राथमिकता देना जरूरी है।

*कंक्रीट के साथ कच्ची जमीन भी जरूरी : अमजद अहमद*
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर इंजीनियर अमजद अहमद ने कहा कि भवन निर्माण के दौरान प्राकृतिक संतुलन का ध्यान रखना चाहिए। कंक्रीट के बजाय निश्चित मात्रा में कच्ची जमीन छोड़नी चाहिए, ताकि बारिश का पानी धरती में समा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी जमीन पर हरी दूब में नंगे पांव चलना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
आईबीसी कोटा सेन्टर के पूर्व अध्यक्ष एवं पीडब्ल्यूडी के पूर्व अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुरेश कुमार बैरवा ने नये इंजीनियरों के लिए नियमित तकनीकी सेमिनार आयोजित करने और विभिन्न परियोजनाओं के तकनीकी निरीक्षण कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में आईबीसी के नये सदस्यों का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत और सम्मान किया गया।
प्रारंभ में आईबीसी कोटा लोकल सेन्टर के चेयरमैन इंजीनियर हेमन्त कुमार शर्मा ने कहा कि इस तरह के तकनीकी आयोजन कोटा विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, आर्किटेक्ट्स और प्लानर्स के लिए भविष्य में काफी उपयोगी साबित होंगे। आगजनी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भवन निर्माण के साथ सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।
अन्त में आईबीसी कोटा लोकल सेंटर के सचिव इंजीनियर मनीष जैन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज की व्याख्याता रक्षा सनाढ्य ने किया।

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