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ग्राम विकास अधिकारीयों की आत्महत्याओं पर राजस्थान ग्राम विकास अधिकारीयों ने आक्रोश जताते हुए राज्य सरकार को दी चेतावनी

चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल|राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ (पंजी) जयपुर की चित्तौड़गढ़ कार्यकारिणी ने दो ग्राम विकास अधिकारीयों की आत्महत्याओं की घटना पर आक्रोश जताते हुए अनाधिकृत व्यक्तियों व विभागीय अधिकारियों द्वारा अनुचित कार्य करवाने का दबाव डालने से आत्महत्याओं की घटना होने का आरोप लगाते हुए जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर धरना देते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।
शुक्रवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा के बाद जिला कलक्टर एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को राज्य सरकार के नाम दिए गए ज्ञापन के दौरान राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष भारत सिंह, प्रदेश प्रतिनिधि मोहम्मद दानिश, जिला मंत्री मुक्ता लोट, उपाध्यक्ष दुर्गेश शर्मा, कोषाध्यक्ष रामेश्वर जाट, विक्रम सिंह, नरेंद्र शर्मा, पारस विश्नोई, विनोद ढाका, राहुल आचार्य, मदनलाल धाकड़, भरत मेनारिया , मुबारिक खान सहित पूरे जिले से आए ग्राम विकास अधिकारी एवं अतिरिक्त विकास अधिकारी खूबचंद खटीक, महेंद्र सिंह आदि मौजूद रहें।

उन्होंने राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री, मुख्य सचिव एवं शासन सचिव एवं आयुक्त के नाम जिला कलक्टर एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बताया गया कि पंचायत समिति शाहपुरा में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी शंकरलाल मीना पर ग्राम पंचायत गिरडीया में अनाधिकृत व्यक्तियों व विभागीय अधिकारियों द्वारा लंबे समय से अनुचित कार्य करवाने का दबाव डाला जा रहा था। जिसकी सूचना उच्च अधिकारियों को मृतक और उसके परिजनों द्वारा मौखिक व लिखित रूप में बार बार दी गई किन्तु जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस प्रशासनिक प्रताड़ना एवं मानसिक उत्पीडन के कारण शंकर लाल मीणा अत्यधिक तनावग्रस्त हो गया और लगभग तीन माह से मानसिक अवसाद में था इस संबध में संगठन द्वारा भी पंचायत समिति स्तरीय अधिकारियों को अवगत करवाया गया लेकिन इसका कोई निराकरण नहीं किया गया जिसके कारण मानसिक दबाव में शंकर लाल मीणा ने आत्म हत्या जैसा हृदयविदारक कदम उठाते हुए अपने घर पर 11 नवम्बर 2025 को फांसी के फंदे से झूलकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली गई।
संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह आत्म हत्या नहीं है यह कुछ लोगों द्वारा की गई जघन्य हत्या है। इस कारण एक निर्दोष को अपनी जान गवानी पड़ी जो व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में विगत् 15 दिवस में यह दूसरी घटना है जिसमें ग्राम विकास अधिकारी द्वारा आत्महत्या जैसा हृदय विदारक कदम उठाया गया है। इससे पूर्व 27 अक्टूबर, 2025 को पंचायत समिति केकड़ी जिला अजमेर में भी ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण कुमार कुमावत ने मानसिक अवसाद में फांसी से झूलकर अपनी जीवन लीला समाप्त की है। इन घटनाओं से प्रदेश के 10 हजार ग्राम विकास अधिकारियों में जबरदस्त आक्रोश एवं निराशा व्याप्त है।

ज्ञापन में उन्होंने सरकार से मांग रखी कि शंकरलाल मीना एवं प्रवीण कुमार कुमावत की आत्महत्या की घटना की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और घटना के दोषी अधिकारियो, जनप्रतिनिधियों एवं अन्य लोगों के विरुद्ध पुलिस थाना पाण्डेर भीलवाड़ा एवं केकड़ी अजमेर में दर्ज मुकद्दमे की शीघ्र जांच करवाकर आगामी 7 दिवस में अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी एवं प्रशासनिक कार्यवाही की जावें साथ ही दिवंगत ग्राम विकास अधिकारियों के परिजनों को 30 दिवस में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जावे। राज्य सरकार के स्थानांतरण पर प्रतिबंध के बावजूद कार्य व्यवस्था के नाम पर पंचायत समिति एवं जिला परिषद् स्तरीय अधिकारियों द्वारा ग्राम विकास अधिकारियों के मनमाने स्थानांतरण कर प्रताड़ना देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्यवाही की जावे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रत्येक ब्लॉक पर पंचायत समिति स्तरीय अधिकारियों एवं समस्त ग्राम विकास अधिकारियों की प्रतिमाह प्रकोष्ठ बैठके आयोजित करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाए।

मांगों पर आगामी सात दिवस में प्रभावी कार्यवाही नहीं होने पर संगठन ने प्रदेश व्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।

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