भीषण गर्मी में बढ़ीं बीमारियां-अस्पताल में मरीजों की भीड़ से बिगड़े हालात,

 

– एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा अलीगढ़ सीएचसी-घंटों इंतजार को मजबूर मरीज

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|उनियारा उपखण्ड के अलीगढ़ कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण गर्मी के चलते मौसमी बीमारियों ने तेजी से पैर पसार लिए हैं। जुकाम, बुखार, खांसी और पेट दर्द सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) अलीगढ़ में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
सीएचसी अलीगढ़ अस्पताल में हालात यह हैं कि प्रतिदिन 300 से 400 मरीज ईलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि व्यवस्थाएं बेहद सीमित हैं। वर्तमान में अस्पताल में केवल एक ही स्थाई चिकित्सक डॉ. मधुसूदन शर्मा मरीजों का ओपीडी, इमरजेंसी और एमएलसी जैसे सभी कार्य संभाल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को घंटों लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
*पांच पद स्वीकृत-फिर भी एक डॉक्टर के भरोसे अस्पताल*
सीएचसी अलीगढ़ अस्पताल में चिकित्सकों के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल तीन डॉक्टर ही नियुक्त हैं। इनमें से एक को विभागीय जांच के चलते प्रतिनियुक्ति पर अन्यत्र भेज दिया गया है, जबकि दूसरे डॉक्टर गिरीश कटारिया जो अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी होने के चलते विभागीय कार्यों, मीटिंगों और अवकाश के चलते अनुपस्थित रहते हैं। इससे पूरा भार एक ही चिकित्सक पर आ गया है।
*सुविधाओं का अभाव-मरीज परेशान*
अस्पताल में एक्स-रे और अन्य महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को जांच के लिए टोंक या सवाई माधोपुर जाना पड़ रहा है या फिर निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे मरीजों को आर्थिक, मानसिक और समय की भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
*महिला चिकित्सक नहीं-प्रसूताओं को करना पड़ता है रैफर*
महिला चिकित्सक के अभाव में अस्पताल में प्रसव सुविधा भी ठप है। गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए उनियारा या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जो गंभीर स्थिति में जोखिम भरा साबित हो सकता है।
*108 एम्बुलेंस नहीं-गंभीर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें*
सीएचसी अलीगढ़ जो कि तहसील व पंचायत समिति मुख्यालय है, उसके बावजूद भी अस्पताल में 108 एम्बुलेंस सेवा का अभाव है। दुर्घटना या गंभीर मरीजों को रैफर करने के दौरान समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। कई बार कॉल करने के बाद भी एम्बुलेंस देरी से पहुंचती है, जिससे परिजनों को मजबूरन निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता है।
*हाईवे पर स्थित अस्पताल-रोज आते हैं हादसे के मरीज*
नेशनल हाईवे 116 (552) के पास अलीगढ़ कस्बा स्थित इस अस्पताल में आए दिन सड़क हादसों के घायल भी पहुंचते हैं। साथ ही 100 से अधिक गांवों की आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है, जिससे दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
*जनप्रतिनिधियों से कई बार मांग-फिर भी नहीं मिली राहत*
स्थानीय लोगों ने कई बार चिकित्सा विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक न तो डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई गई और न ही एम्बुलेंस जैसी अन्य मूलभूत सुविधा अस्पताल में उपलब्ध कराई गई।