कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा बोले—उर्वरकों की कमी की चिंता न करें किसान, प्रदेश में डीएपी के 18 दिन और यूरिया के 35 दिन का स्टॉक उपलब्ध,
* कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्ती, 1,238 फर्मों को नोटिस, 128 के प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/जयपुर। स्मार्ट हलचल|राजस्थान में रबी सीजन के दौरान किसानों को डीएपी और यूरिया की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि खरीफ सीजन-2026 में प्रदेश में दोनों प्रमुख उर्वरकों की मांग से अधिक आपूर्ति की गई है। रबी सीजन में भी किसानों की मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार से भी उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति हो रही है। ऐसे में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
*खरीफ में मांग से अधिक मिला डीएपी और यूरिया*
कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन-2026 में प्रदेश में डीएपी की 5 लाख 10 हजार मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 5 लाख 44 हजार 995 मीट्रिक टन उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार यूरिया की 11 लाख मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध 17 लाख 15 हजार 814 मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई। उन्होंने बताया कि रबी सीजन में बुवाई अभी प्रारंभिक अवस्था में है। वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख 5 हजार 584 मीट्रिक टन डीएपी और 3 लाख 63 हजार 969 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त डीएपी के 14 रैक, जिनमें लगभग 35 हजार मीट्रिक टन उर्वरक है, परिवहन के दौरान हैं। इनके 14 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध होने की संभावना है।
डॉ. मीणा के अनुसार, वर्तमान साप्ताहिक खपत के आधार पर प्रदेश में लगभग 18 दिन का डीएपी और 35 दिन का यूरिया स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र से लगातार आपूर्ति बनाए रखने के साथ रबी सीजन में किसानों की जरूरतों के अनुरूप वितरण सुनिश्चित करने की तैयारियां की जा रही हैं।
*कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई*
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया के अवैध डायवर्जन, जबरन टैगिंग और अन्य अनियमितताओं में लिप्त विक्रेताओं के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026-27 में अब तक 11,770 उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया तथा 9,585 नमूने लिए गए। अनियमितताएं मिलने पर 1,238 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 64 उर्वरक विक्रेताओं के विक्रय पर रोक लगाई गई, जबकि 128 फर्मों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित अथवा निरस्त किए गए। कार्रवाई के दौरान 25 व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई तथा 11 गिरफ्तारियां भी हुईं।
*सभी जिलों में कंट्रोल रूम, गुणवत्ता पर निगरानी*
उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कृषि विभाग विशेष गुण नियंत्रण अभियान चला रहा है। इसके तहत औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर उर्वरकों की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है।
*नैनो उर्वरकों की खरीद के लिए दबाव नहीं*
डॉ. मीणा ने कहा कि किसानों पर नैनो डीएपी और नैनो यूरिया खरीदने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। किसान अपनी इच्छा और आवश्यकता के अनुसार इन उत्पादों की खरीद एवं उपयोग का निर्णय ले सकते हैं। सरकार उपलब्ध परिणामों को ध्यान में रखते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।
*जबरन टैगिंग पर रोक लगाने के निर्देश*
कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उर्वरक वितरण कृषि विभाग के कार्मिकों की उपस्थिति में करवाया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक मिल सकें और वितरण प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि उर्वरकों की उपलब्धता, गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखें तथा किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।