“संपत्ति विल देगी, संस्कार गुडविल देंगे”, भागवत कथा में संत ने दिया नई पीढ़ी को संस्कारों का संदेश
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहां नई पीढ़ी को ऊंचाइयों तक पहुंचने की होड़ सिखाई जा रही है, वहीं विजयपुर की पावन धरा से संत दिग्विजय राम ने एक ऐसा संदेश दिया जिसने हर श्रोता को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि “नई पीढ़ी को चांद-सितारे छूने की शिक्षा देने से पहले माता-पिता और गुरु के चरण छूना सिखाइए। संपत्ति केवल विल बनाएगी, लेकिन संस्कार गुडविल देंगे।”
अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों के बीच स्थित विजयपुर में नृसिंहद्वारा के समीप राव नरेन्द्र सिंह कृषि फार्म पर मूंदड़ा परिवार की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा मर्मज्ञ रामस्नेही संत दिग्विजय राम ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
रविवार को कथा के दौरान संत ने कहा कि आज समाज में भौतिक संपन्नता बढ़ रही है, लेकिन संस्कारों का क्षरण चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता अपनी संतान को केवल धन-संपत्ति देकर जाएंगे तो वह कानूनी दस्तावेज यानी ‘विल’ बनकर रह जाएगी, लेकिन यदि संस्कार देंगे तो वही संतान परिवार और समाज में ‘गुडविल’ बनाएगी।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि वृद्धाश्रम हमारी सनातन संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहे। यह बदलते परिवेश और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण का परिणाम है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की गरिमा के प्रतिकूल है। उन्होंने माता-पिता की सेवा को परमात्मा की सच्ची सेवा बताते हुए कहा कि वास्तविक आनंद और परमानंद किसी तीर्थ या बाहरी साधन में नहीं, बल्कि अपने घर में माता-पिता की सेवा और सम्मान में छिपा है।
संत दिग्विजय राम ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज रिश्ते-नाते भी “यूज एंड थ्रो” की मानसिकता के शिकार हो रहे हैं। यह समाज के विघटन का बड़ा कारण बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौन व्रत और साधना व्यक्ति को भीतर से परिपक्व बनाती है। व्रत-उपवास केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम हैं।
कथा के दौरान उन्होंने ध्रुव, जड़भरत, भक्त प्रह्लाद, नृसिंह अवतार, राजा पृथु और अजामिल जैसे प्रसंगों की मार्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प जीवन को दिव्यता की ओर ले जाते हैं।
प्रवचन के बीच जब संत ने अपने मधुर कंठ से “म्हारा चारभुजा रा नाथ” और “सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम रहिए” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी तो पूरा पांडाल भक्तिरस में सराबोर हो उठा। श्रद्धालु झूमने लगे और वातावरण जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। कथा के प्रारंभ और विश्राम के समय मूंदड़ा परिवार के मुखिया बंशीलाल मूंदड़ा, दामोदर मूंदड़ा, संदीप मूंदड़ा, शिवकुमार मूंदड़ा, ओमप्रकाश मूंदड़ा, कमलकुमार मूंदड़ा, अशोक कुमार मूंदड़ा और दिलीप मूंदड़ा ने विधिवत पूजा-अर्चना व आरती की।
कथा श्रवण के लिए पूर्व राज्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, राव नरेन्द्र सिंह विजयपुर, पूर्व पालिका अध्यक्ष रमेश नाथ योगी, चित्तौड़गढ़ शहर कांग्रेस अध्यक्ष अनिल सोनी, विजयपुर प्रशासक श्यामलाल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
कथा स्थल पर गूंजता रहा एक ही संदेशकृ
“नई पीढ़ी को ऊंचा उड़ना जरूर सिखाइए, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी ज्यादा जरूरी है।”
