– अलीगढ़ थानाधिकारी तलब-17 मार्च को कोर्ट में देना होगा जवाब-मेडिकल रिपोर्ट में अस्पष्टता और जांच की धीमी रफ्तार पर अदालत नाराज,
– कोर्ट के सख्त रुख के बाद हरकत में आई पुलिस-पीड़ित शिक्षक का पुलिस ने चोरू पीएचसी में कराया मेडिकल,
– तीन आरोपी अब भी फरार-एक आरोपी का नाम जांच से हटाने पर उठे गंभीर सवाल
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|उनियारा सर्किल के अलीगढ़ थाना क्षेत्र के बराना गांव के श्मशान घाट में सरकारी शिक्षक के साथ मारपीट कर जानलेवा हमला करने और नग्न हालत में श्मशान घाट में फेंकने के अमानवीय और सनसनीखेज मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने पुलिस जांच पर कड़ा रुख अपनाया है।
4 अक्टूबर 2025 की रात हुए इस हमले के बाद दर्ज प्रकरण संख्या 151/2025 की जांच में ढिलाई, मेडिकल रिपोर्ट में अस्पष्टता और आरोपियों की गिरफ्तारी में सुस्ती को लेकर अदालत ने गंभीर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने अलीगढ़ थानाधिकारी राजकुमार चौधरी को व्यक्तिगत रूप से 17 मार्च 2026 को अदालत में उपस्थित होकर जांच की स्थिति पर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
यह निर्देश न्यायमूर्ति प्रमिल कुमार माथुर की एकलपीठ ने उस समय दिए जब आरोपियों राकेश मीणा और सांवलराम मीणा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवादी पक्ष के अधिवक्ता लाखन सिंह मीणा ने अदालत के सामने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए।
*मेडिकल रिपोर्ट पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी*
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पीड़ित श्योदास मीणा (सरकारी शिक्षक) निवासी अलीमपुरा को गंभीर चोटें आई हैं और मामले को जानलेवा हमला बताया गया है, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसी स्पष्ट मेडिकल राय पेश नहीं की गई, जिससे यह तय हो सके कि चोटें वास्तव में जानलेवा श्रेणी की हैं या नहीं। अदालत ने बीएनएसएस की धारा 109 के तहत स्पष्ट मेडिकल राय प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के कड़े सख्त रुख के बाद अलीगढ़ थाना पुलिस ने पीड़ित शिक्षक का एम्बुलेंस में लाकर 15 मार्च रविवार को चोरू कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पुनः मेडिकल मुआयना करवाया। यह मेडिकल चिकित्सा अधिकारी डॉ. निखिल शर्मा द्वारा किया गया, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट 17 मार्च मंगलवार को हाईकोर्ट में पेश की जाएगी।
*जांच में पक्षपात के आरोप*
मामले में अलीगढ़ थाना पुलिस के तत्कालीन जांच अधिकारी सहायक उप निरीक्षक भंवरलाल मीणा द्वारा की गई पुलिस जांच को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रारंभिक जांच में चार आरोपियों के नाम सामने आए थे, लेकिन बाद में कथित सांठगांठ के चलते विजेंद्र मीणा निवासी अलीमपुरा का नाम जांच से हटा दिया गया।वहीं अब तक पुलिस केवल एक आरोपी राकेश मीणा को ही गिरफ्तार कर पाई है। जबकि अन्य आरोपी सांवलराम मीणा व धारासिंह मीणा निवासी बराना अभी तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं पीड़ित शिक्षक पक्ष का आरोप हैं कि वर्तमान जांच अधिकारी थानाधिकारी राजकुमार चौधरी (पुलिस निरीक्षक) द्वारा भी जांच में ढिलाई देकर आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
*पुलिस अधीक्षक ने घोषित किया इनाम-फिर भी गिरफ्तारी नहीं*
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक टोंक द्वारा दोनों आरोपियों पर अलग-अलग 5-5 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।
*कोर्ट के आदेश के बाद ही हरकत में आई पुलिस*
हाईकोर्ट द्वारा जांच अधिकारी थानाधिकारी अलीगढ़ राजकुमार चौधरी को तलब करने के आदेश के बाद ही पुलिस की सक्रियता दिखाई दी। अलीगढ़ थाना पुलिस के सहायक उप निरीक्षक भंवरलाल मीणा ने पीड़ित शिक्षक का चोरू पीएचसी में चोटों की गंभीरता को लेकर कोर्ट के निर्देशों की पालना में मेडिकल मुआयना करवाया, ताकि अदालत में स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
*अब 17 मार्च की सुनवाई पर टिकी निगाहें*
अब 17 मार्च को जयपुर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
अदालत के सामने अलीगढ़ थानाधिकारी राजकुमार चौधरी को स्वयं उपस्थित होकर
जांच की प्रगति, मेडिकल रिपोर्ट, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर विस्तृत जवाब देना होगा। यह पूरा मामला एक बार फिर गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
