शिक्षक दिवस विशेष: पनोतिया के विद्यार्थियों को विज्ञान शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ रहे शिक्षक महेश कुमार कोली

प्रयोगों से अंतरिक्ष की खोज तक ग्रामीण विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की अनूठी पहल

अरवड़, स्मार्ट हलचल।शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे नई दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इसी सोच को अपने कार्यों से साकार कर रहे हैं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पनोतिया, ब्लॉक शाहपुरा के विज्ञान अध्यापक महेश कुमार कोली। वर्ष 2014-15 से ग्रामीण विद्यार्थियों के बीच विज्ञान शिक्षण को नई दिशा देने में जुटे कोली ने विज्ञान को प्रयोग, नवाचार, अनुसंधान और तकनीक से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए सीखने के नए अवसर तैयार किए हैं।

कक्षा से निकलकर प्रयोगों की दुनिया तक पहुंचा विज्ञान

महेश कुमार कोली ने विज्ञान शिक्षण को केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को करके सीखने के अवसर उपलब्ध करवाए। विद्यालय की प्रार्थना सभा में प्रत्येक शनिवार पिछले करीब 10 वर्षों से ‘कबाड़ से जुगाड़’ आधारित सरल एवं रोचक विज्ञान प्रयोगों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सहभागिता और वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने के साथ विज्ञान को दैनिक जीवन से जोड़ना है।

इंस्पायर अवार्ड में विद्यार्थियों की भागीदारी

ग्रामीण विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के लिए कोली द्वारा इंस्पायर अवार्ड योजना के तहत विद्यार्थियों को नवाचारी विचार और वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने के लिए लगातार प्रेरित किया गया। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के अब तक 11 विद्यार्थियों का चयन इंस्पायर अवार्ड के लिए हुआ है।

विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े प्रमुख आंकड़े

  • 75 से अधिक विद्यार्थियों ने NASA नागरिक वैज्ञानिक प्रमाण-पत्र प्राप्त किए।
  • 11 विद्यार्थियों का चयन इंस्पायर अवार्ड के लिए हुआ।
  • ‘कबाड़ से जुगाड़’ आधारित विज्ञान प्रयोग करीब 10 वर्षों से किए जा रहे हैं।
  • 2022QV57 और 2024SD57 नामित दो क्षुद्रग्रहों की खोज की जानकारी दी गई है।

प्रयोगों से अंतरिक्ष की खोज तक

महेश कुमार कोली के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने International Astronomical Search Collaboration (IASC) के अंतर्गत NASA के Asteroid Search Campaign में भाग लिया। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और क्षुद्रग्रह खोज जैसी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला।

अब तक 75 से अधिक विद्यार्थियों ने NASA नागरिक वैज्ञानिक प्रमाण-पत्र प्राप्त किए हैं। विद्यार्थियों द्वारा वर्ष 2022 में 2022QV57 तथा वर्ष 2024 में 2024SD57 नामित दो क्षुद्रग्रहों की खोज किए जाने की जानकारी दी गई है। इनके भविष्य में नामकरण का अधिकार IASC द्वारा प्रदान किए जाने की बात भी बताई गई है।

क्षुद्रग्रह खोज जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति विशेष उत्साह पैदा किया है।

विज्ञान मेले और बाल विज्ञान शोध में निरंतर भागीदारी

विद्यालय के विद्यार्थी राज्य स्तरीय विज्ञान मेलों के साथ-साथ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की बाल विज्ञान शोध प्रतियोगिताओं में भी भाग लेते रहे हैं। विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान करने, आंकड़े एकत्र करने, उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करने और संभावित समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर नवाचारों को मिली पहचान

विज्ञान शिक्षण में नवाचार और विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों के लिए महेश कुमार कोली को राष्ट्रीय शून्य निवेश नवाचार पुरस्कार के साथ साइबरपीस अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अलावा वे शून्य बजट विज्ञान प्रयोग से संबंधित पुस्तक निर्माण के लिए गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति में राजस्थान के प्रतिनिधि के रूप में योगदान दे चुके हैं। उन्होंने कक्षा 8 की कंप्यूटर पुस्तक के लेखन में भी योगदान दिया है। वे विद्यार्थियों और शिक्षकों में साइबर सुरक्षा तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं।

‘ग्रामीण विद्यार्थियों में प्रतिभा की कमी नहीं, अवसर की जरूरत है’

महेश कुमार कोली का मानना है कि ग्रामीण विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। जरूरत उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रयोग करने का मंच उपलब्ध कराने की है। उनका प्रयास है कि विद्यार्थी केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि सवाल पूछें, प्रयोग करें, शोध करें और अपने आसपास की समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजें।

शिक्षक दिवस के अवसर पर महेश कुमार कोली की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि समर्पित शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण विद्यार्थियों को विज्ञान की कक्षा से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।