स्मार्ट हलचल|काछोला 1 सितंबर -कस्बे सहित क्षेत्र में तीज का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।विवाहित महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र,अच्छे स्वास्थ्य,और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखकर प्रार्थना करती है।वही अविवाहित युवतियां भी अपने मन पसंद वर पाने के लिए व्रत करती है।वही महिलाओं ने बताया कि तीज पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन और प्रकृति के स्वागत के लिए मनाया जाता है।
शिव-पार्वती का मिलन – पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 बार कठोर तपस्या की थी। उनकी इस साधना के बाद श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को उनका विवाह हुआ, जिसे शिव-पार्वती के दिव्य मिलन के रूप में मनाया जाता है।
प्रकृति और मानसून का स्वागत: यह त्योहार वर्षा ऋतु (सावन-भादो) में आता है जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। यह प्रकृति के सौंदर्य, उमंग और उल्लास का भी प्रतीक है।
वही महिलाएं इस दिन हाथों में मेहंदी रचा, नए वस्त्र पहनती हैं और झूला झूलती हैं।भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
