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जंगल में आतंकी ट्रेनिंग सेंटर खोलने की तैयारी में था रांची का डॉक्टर

 आतंकी संगठन अलकायदा इंडियन सब कंटिनेंट (एक्यूआइएस) से जुड़े होने के संदेह में झारखंड से हिरासत में लिए गए आठ संदिग्धों में से पांच की विधिवत गिरफ्तारी हो गई है। उन्हें एटीएस ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया है। शेष तीन को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।

जानकारी के अनुसार बरियातू से गिरफ्तार इस आतंकी गिरोह का मास्टर माइंड डा. इश्तियाक रांची के चान्हो के जंगल में आतंकियों का प्रशिक्षण केंद्र खोलने वाला था। इसके लिए उसने जमीन भी देख ली थी, जिसमें एक मदरसा संचालक मुफ्ती उसकी मदद कर रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, मुफ्ती रहमतुल्लाह ने चटवाल के एक सुनसान इलाके में मदरसा खोल रखा था, जहां आम लोगों का आना-जाना नहीं था। इस मदरसे में युवकों को आतंकी संगठन के कामकाज की जानकारी दी जा रही थी। डॉ. इश्तियाक इस पूरे ऑपरेशन का प्रमुख था और इसके तहत चान्हो के जंगल में हथियार प्रशिक्षण देने की तैयारी थी।

डॉ. इश्तियाक की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर एटीएस और दिल्ली पुलिस ने रांची, लोहरदगा और हजारीबाग में छापेमारी की। छापेमारी में खुलासा हुआ कि इश्तियाक रांची में मेडिका अस्पताल से जुड़ा था और पिछले छह सालों से वहीं काम कर रहा था। इसके अलावा, वह लोहरदगा और हजारीबाग के नर्सिंग होम और लैब्स से भी जुड़ा हुआ था।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय हो गई है। ईडी जमीन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अलकायदा से जुड़े लिंक की जांच करेगी। जानकारी के मुताबिक, बरियातू स्थित लेक व्यू अस्पताल का लाइसेंस अफसर अली के नाम पर है, लेकिन उसका संचालन बबलू खान कर रहा था, जो डॉ. इश्तियाक का सहयोगी है। ईडी को शक है कि जमीन घोटाले के जरिए जुटाए गए धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों में किया जा रहा था।

गौरतलब है कि रांची से गिरफ्तार डॉ. इश्तियाक अहमद को अलकायदा मॉड्यूल की कमान लगभग छह साल में मिली थी। झारखंड और ओडिशा में अलकायदा की पकड़ कमजोर होने के बाद, इश्तियाक को मॉड्यूल को पुनः मजबूत करने का जिम्मा सौंपा गया था। वह लगातार युवाओं को इस आतंकी संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा था, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

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