1994 में मिला छात्रकला सम्मान, तीन दशक बाद उसी मंच पर निर्णयकर्ता बनना बना भावुक गौरव का क्षण
उदयपुर, 14 जनवरी।स्मार्ट हलचल| कला के पथ पर चलने वाला हर विद्यार्थी किसी एक क्षण, किसी एक मंच और किसी एक सम्मान को जीवनभर अपने भीतर सँजोकर रखता है। वही क्षण कभी आत्मविश्वास बनता है, तो कभी संघर्ष में संबल। उदयपुर के सृजनधर्मी शिक्षक और शिल्पकार हेमंत जोशी के जीवन में ऐसा ही एक निर्णायक क्षण वर्ष 1994 में आया था, जब उन्हें राजस्थान ललित कला अकादमी का प्रतिष्ठित छात्रकला पुरस्कार प्राप्त हुआ।
समय ने तीन दशक की लंबी यात्रा तय की और वही विद्यार्थी, वही कलाकार, अब उसी पुरस्कार के निर्णायक मंडल का सदस्य बनकर उसी मंच पर लौटा—यह अवसर केवल संयोग नहीं, बल्कि कला-साधना की परिपक्वता और निरंतरता का प्रतीक बन गया।
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर द्वारा आयोजित 45वीं राज्य स्तरीय छात्रकला प्रदर्शनी में हेमंत जोशी ने निर्णायक के रूप में भाग लिया। यह प्रदर्शनी प्रतिवर्ष राज्यभर के उभरते छात्र-कलाकारों को उनकी सृजनशीलता के प्रदर्शन और पहचान का अवसर प्रदान करती है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की कृतियाँ अकादमी को प्राप्त हुईं।
अकादमी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, राज्यभर से प्राप्त कृतियों में से 10 उत्कृष्ट कलाकृतियों को पुरस्कार तथा लगभग 100 कृतियों को प्रदर्शनी के लिए चयनित किया गया। इस चयन प्रक्रिया हेतु गठित निर्णायक मंडल की बैठक राजस्थान ललित कला अकादमी कार्यालय, जयपुर में आयोजित हुई, जिसमें गहन विचार-विमर्श के बाद पुरस्कृत और प्रदर्शनीय कृतियों का चयन किया गया।
इस अवसर को लेकर हेमंत जोशी के लिए सबसे भावनात्मक पहलू यह रहा कि जिस पुरस्कार ने उनके विद्यार्थी जीवन में कला के प्रति उनके विश्वास को मजबूत किया था, आज उसी पुरस्कार के भविष्य को दिशा देने का दायित्व उनके कंधों पर था।
हेमंत जोशी ने अपने भाव साझा करते हुए कहा,
“जिस छात्रकला पुरस्कार ने मुझे एक विद्यार्थी के रूप में पहचान दी, उसी पुरस्कार के निर्णायक का दायित्व मिलना मेरे लिए अत्यंत गर्व और आत्मसंतोष का विषय है। यह केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मेरी कला-यात्रा की पूर्णता जैसा अनुभव है। यह दिखाता है कि कला कभी व्यर्थ नहीं जाती।”
उन्होंने चयनित छात्र-कलाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी की कृतियों में गहरी संवेदना, प्रयोगधर्मिता और समकालीन सोच स्पष्ट दिखाई देती है। युवा कलाकार सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय सरोकारों को नए शिल्प और माध्यमों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो राजस्थान की समृद्ध कला-परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करता है।
उल्लेखनीय है कि हेमंत जोशी लंबे समय से शिक्षा, शिल्प और कला-साधना के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और निर्णायक मंडलों से जुड़े रहे हैं। उनके इस चयन से न केवल उदयपुर, बल्कि पूरे मेवाड़ अंचल को गौरव की अनुभूति हुई है।
राजस्थान ललित कला अकादमी की छात्रकला प्रदर्शनी राज्य के युवा कलाकारों के लिए एक सशक्त मंच मानी जाती है, जहाँ से कई कलाकारों की कला-यात्रा को नई दिशा और पहचान मिलती है। हेमंत जोशी का निर्णायक के रूप में चयन इस बात का प्रमाण है कि आज का विद्यार्थी ही कल का मार्गदर्शक बनता है—और कला की यह परंपरा यूँ ही आगे बढ़ती रहती है।


