शिवराज बारवाल मीना
टोंक/दूनी। स्मार्ट हलचल|जिले की दूनी क्षेत्र के धुंआखुर्द गांव को भले ही नया ग्राम पंचायत मुख्यालय घोषित कर विकास के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोल रही है। गांव में घाड़ से धुंआखुर्द मुख्य बस्ती तक जाने वाला प्रमुख मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर गहरे गड्ढे, टूटी परत और नाली का गंदा पानी लगातार बहने से हालात बदतर बने हुए हैं।
ग्रामीण राजेश कुमार बैरवा सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो पंचायत स्तर पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही संबंधित विभाग ने निरीक्षण कर समस्या का समाधान किया। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में भरा पानी हर समय फिसलन पैदा करता है, जिससे दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार होते-होते बच रहे हैं। बरसात के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाता है।
*स्कूल जाने वाले बच्चों की जान जोखिम में*
इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे गुजरते हैं। कीचड़ और पानी के बीच से होकर निकलना उनकी मजबूरी बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
*पंचायत मुख्यालय-पर मूलभूत सुविधा शून्य*
गांव में माताजी का प्रसिद्ध मंदिर होने के कारण सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन मुख्य मार्ग की दुर्दशा से गांव की छवि भी धूमिल हो रही है। सवाल उठता है कि जब ग्राम पंचायत मुख्यालय का दर्जा दिया गया है, तो क्या प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित है?
*प्रशासन से जवाब मांगते ग्रामीण*
ग्रामीण राजेश कुमार बैरवा सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से तत्काल सड़क मरम्मत, नाली व्यवस्था दुरुस्त करने और स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के दावों की सच्चाई सड़क पर बहते गंदे पानी में साफ दिखाई दे रही है।
*प्रशासन से बड़ा सवाल*
क्या संबंधित विभाग ने मौके का निरीक्षण किया? शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? हादसा होने के बाद ही जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों तक शिकायत दर्ज करवाने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस ज्वलंत समस्या पर संज्ञान लेता
