शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की आभा में निखरा बांकेबिहारी का दिव्य स्वरूप

धवल पोशाक और रजत श्रृंगार से सजे ठाकुरजी, मध्यरात्रि तक दर्शनों के लिए उमड़े श्रद्धालु

अनिल कुमार खींची

ब्यावर। स्मार्ट हलचल।सूरजपोल गेट के बाहर स्थित बांकेबिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुर बांकेबिहारी का मनमोहक एवं दिव्य श्रृंगार किया गया। शशिधवल चांदनी के अनुरूप ठाकुरजी को नवीन श्वेत पोशाक धारण कराई गई। श्वेत पिछवाई, रजत छत्र और चांदी की पताकाओं से सजी ठाकुरजी की युगल छवि श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। चंद्रमा की शीतल आभा में ठाकुरजी का अलौकिक स्वरूप ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वयं चंद्रदेव अमृतवर्षा करने गर्भगृह में उतर आए हों।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष माणक डाणी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी का सर्वांग धवल श्रृंगार किया गया। पंडित जितेंद्र दाधीच के सान्निध्य में गर्भगृह को सफेद सजावटी सामग्री से आकर्षक रूप दिया गया। मंदिर की साज-सज्जा और धवल आभा ने कैलाश पर्वत की दिव्य छटा का एहसास कराया।

ठाकुरजी के इस नयनाभिराम स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने देर रात मध्यरात्रि तक दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी में सजी ठाकुरजी की मनोहारी छवि ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।