हरिनाम की गूंज से आलोकित हुआ शोभायात्रा मार्ग

भक्ति, संकीर्तन और अन्नकूट के साथ संपन्न हुआ षष्ठ दिवसीय चैतन्य महाप्रभु आविर्भाव महामहोत्सव
श्रीहरि संकीर्तन कलियुग का युगधर्म — श्री हरे कृष्ण दास ब्रह्मचारी जी महाराज

कोटा।स्मार्ट हलचल|गणेश नगर स्थित श्री गौर राधागोविंद मंदिर (धरणीधर चौराहा) पर श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के शुभ 540 वां आविर्भाव दिवस पर आयोजित षष्ठ दिवसीय प्राकट्य महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। 27 फरवरी से 4 मार्च 2026 तक चले इस आयोजन के दौरान संपूर्ण क्षेत्र श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन की गूंज से भक्तिमय बना रहा।
यह आयोजन गौड़ीय परंपरा के संत नित्य लीला प्रविष्टि ओम् विष्णुपाद श्री चक्रधर प्रसाद ‘भक्ति शास्त्री’ जी महाराज के कृपा आशीर्वाद से तथा वर्तमान आचार्य श्री हरे कृष्ण दास ब्रह्मचारी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।
मीडिया प्रभारी रवि कुमार झंवर ने बताया कि आविर्भाव दिवस पर बुधवार प्रातः 6 बजे मंगल आरती के पश्चात हरिनाम संकीर्तन प्रभात फेरी निकाली गई। श्रद्धालु भक्तों ने मृदंग, करताल एवं विविध वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ श्रीहरिनाम का गुणगान किया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में भजन-संकीर्तन, बधाई गायन तथा धर्म प्रवचन के कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

ललित नारायण प्रभु के अनुसार, 3 मार्च को सायंकाल दण्डवीर हनुमान मंदिर, महावीर नगर से एक भव्य नगर शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। शोभायात्रा में श्री ठाकुरजी की सुसज्जित झांकी, गुरु परंपरा की आकर्षक झांकियां, ध्वज-पताकाएं एवं बैंड-बाजों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। संकीर्तन करते हुए भक्तगण नृत्य में आत्मविभोर दिखाई दिए।श्री हरे कृष्ण दास ब्रह्मचारी जी महाराज शोभायात्रा में भ​क्तो को आशीर्वाद देते हुए चले। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर आरती उतारी गई तथा चंदन, पुष्पमाला एवं प्रसाद से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

नारायणदास प्रभु ने बताया कि 4 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मध्यान्ह 2:30 बजे श्री ठाकुरजी की भोग आरती संपन्न हुई। भगवान को छप्पन व्यंजनों का अन्नकूट भोग अर्पित किया गया। तत्पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, इंदौर, सागर, दमोह, विदिशा सहित विभिन्न नगरों तथा राजस्थान के भरतपुर, बूंदी, अजमेर, भीलवाड़ा, वृंदावन, दिल्ली और देहरादून से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर आचार्य श्री हरे कृष्ण दास ब्रह्मचारी जी महाराज ने सत्संग में युगधर्म श्रीहरि संकीर्तन की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मानव जीवन की सार्थकता भगवद भजन, सेवा और सत्संग में निहित है। मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा आचार्य श्री का सम्मान किया गया तथा बाहर से पधारे संतों एवं भक्तों का अभिनंदन किया गया।