बनेठा थाना क्षेत्र में बजरी माफिया बेलगाम-थाने के साये में अवैध परिवहन

– पुलिस-वन विभाग और एसआईटी पर उठ रहे गंभीर सवाल

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|टोंक जिले के उनियारा सर्किल अंतर्गत बनेठा थाना क्षेत्र में कथित रूप से अवैध बजरी खनन व परिवहन का खेल खुलेआम चलने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाने के आसपास से ही बजरी से भरे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली रात्रि के अलावा दिनदहाड़े गुजरते देखे जा सकते हैं, लेकिन कार्रवाई न के बराबर है।
खबर में नाम नहीं छापने की शर्त पर बजरी व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों सहित ग्रामीणों का आरोप है कि एक सहायक उपनिरीक्षक हनुमान प्रसाद मीणा, थानाधिकारी के रीडर दयाराम जाट सहित कुछ पुलिस कार्मिकों की कथित मिलीभगत से यह अवैध धंधा पनप रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा जोरों पर है कि आखिर संरक्षण किसका है?
*लाइन हाजिर कार्रवाई, लेकिन आधी कहानी?*
बीते दिनों कथित एंट्री लेन-देन और व्हाट्सएप चैटिंग के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजेश कुमार मीणा (जिला पुलिस अधीक्षक, टोंक) ने संज्ञान लेते हुए सरकारी जीप चालक नरेंद्र सिंह राजपूत और सिपाही विक्रम सिंह मीणा को लाइन हाजिर कर दिया। लेकिन अब सवाल यह है कि जिन नामों पर सीधे संरक्षण के आरोप लग रहे हैं, उनके खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
*थाने के पास कतारबद्ध वाहन-संयोग या संरक्षण?*
स्थानीय सूत्रों के अनुसार छतरी चौराहा, जो बनेठा थाने से सटा हुआ इलाका है, वहां कई बार बजरी से भरे वाहन कतार में बजरी का परिवहन करते नजर आते हैं। यदि यह सत्य है, तो क्या यह सब पुलिस की नजरों से ओझल है या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? इतना ही नहीं, ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली कच्चे रास्तों और नालों में फंसते भी देखे गए हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंचती है, लेकिन कथित तौर पर बिना जब्ती या चालानी कार्रवाई के लौट आने के भी गम्भीर आरोप हैं। जिन्हें मीडिया के सवालों पर पुलिस भी स्वीकार ती नजर आती हैं।
*वन विभाग-राजस्व प्रशासन और एसआईटी की भूमिका पर सवाल*
अवैध खनन रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। वन विभाग, राजस्व विभाग और उपखण्ड प्रशासन की भी समान जिम्मेदारी है। उपखण्ड क्षेत्र में गठित एसआईटी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि एसआईटी कागजों में गठित है लेकिन धरातल पर कार्रवाई नहीं दिख रही, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा प्रश्न है।
*राजस्व हानि और पर्यावरणीय संकट*
अवैध बजरी परिवहन से सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान होता है। साथ ही नदियों और नालों से अनियंत्रित खनन पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रभावित करता है। ओवरलोड वाहन ग्रामीण सड़कों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
*बड़े सवाल-जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा*
* क्या बनेठा थाना क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन हो रहा है?
* यदि हां, तो जिम्मेदार कौन है?
* क्या नामजद पुलिस कर्मियों की निष्पक्ष विभागीय जांच होगी?
* एसआईटी ने अब तक कितनी कार्रवाई की और उसका परिणाम क्या रहा?
* क्या उच्चाधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण कराया जाएगा?
* जब कथित तौर पर थाने के साये में बजरी के वाहन गुजर रहे हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
*प्रशासनिक जवाबदेही तय हो*
यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता का प्रश्न है। आवश्यक है कि पुलिस अधीक्षक स्तर से लेकर उपखण्ड प्रशासन तक निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।