21 लाख रुपये लौटाकर वर पक्ष ने पेश की मिसाल

मदन मोहन गर्ग

गीता देवी नरुका के पौत्र के तिलक दस्तूर में केवल चांदी का कलदार किया स्वीकार, सादगीपूर्ण विवाह व दहेजमुक्त समाज का दिया संदेश

गंगापुर सिटी, स्मार्ट हलचल। रिश्तों की मजबूती धन-दौलत से नहीं, बल्कि संस्कारों और आपसी सम्मान से होती है। इसी विचार को साकार करते हुए केकड़ी में आयोजित एक तिलक दस्तूर समारोह समाज के लिए प्रेरणा बन गया। वधु पक्ष द्वारा परंपरा के निर्वहन के तहत 21 लाख रुपये नकद एवं चांदी का सिक्का नजराने के रूप में भेंट किया गया, लेकिन वर पक्ष ने केवल चांदी का एक कलदार स्वीकार कर पूरी 21 लाख रुपये की राशि सम्मानपूर्वक लौटा दी। इस अनुकरणीय पहल ने समाज में सादगीपूर्ण विवाह और दहेज जैसी कुप्रथा के विरुद्ध एक सशक्त संदेश दिया। केकड़ी निवासी महावीर सिंह तोमर की पौत्री एवं संजय सिंह तोमर की पुत्री व विजय सिंह तोमर की भतीजी पूजा कंवर का रिश्ता गंगापुर सिटी निवासी नन्नू सिंह नरूका एवं गंगापुर सिटी नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन गीता देवी नरुका के पौत्र तथा दीपक सिंह नरूका के पुत्र अनुज सिंह के साथ तय हुआ है। शनिवार को केकड़ी में सगाई एवं तिलक दस्तूर समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों परिवारों के परिजन, रिश्तेदार तथा समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। तिलक दस्तूर की रस्म के दौरान वधु पक्ष ने परंपरानुसार वर पक्ष को 21लाख रुपये नकद एवं चांदी का सिक्का नजराने के रूप में भेंट किया। किंतु वर पक्ष के नन्नू सिंह नरूका एवं दीपक सिंह नरूका परिवार ने केवल एक चांदी का कलदार स्वीकार करते हुए शेष 21 लाख रुपये की पूरी राशि लौटा दी। नरूका परिवार के इस निर्णय की समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों ने कहा कि आज जब विवाह समारोहों में दहेज और अनावश्यक खर्च सामाजिक चिंता का विषय बने हुए हैं, ऐसे समय में यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। परिवार ने यह संदेश दिया कि रिश्तों का आधार धन नहीं, बल्कि संस्कार, सम्मान और
पारिवारिक मूल्य होने चाहिए। समारोह में इस निर्णय की व्यापक प्रशंसा हुई और समाज के प्रबुद्धजनों ने इसे नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय पहल बताते हुए ऐसे प्रयासों को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। समारोह में समाज के अनेक गणमान्यजन एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजबंधुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें अर्जुन सिंह कुशवाह, सहदेव सिंह कुशवाह (बिजयनगर), भीम सिंह कुशवाह (बिजयनगर), शंकर सिंह (सरवाड़), शिव सिंह (पिपरौली), भूपेन्द्र सिंह (सावर), रोबिन सिंह (टांकावास), अंबिका चरण सिंह (कालेड़ा), गोपाल सिंह (कादेडा), वीरभद्र सिंह (बघेरा), महेन्द्र सिंह (ठोस), शक्ति सिंह (हरपुरा), शक्ति सिंह गोड़ (पारा), बलवीर सिंह सापंदा (सरपंच), भरत सिंह सापंदा, होनहार सिंह सापंदा (प्रधान), भगवान सिंह, भंवर चेतन सिंह (बिलिया), जसवंत सिंह (डोराई), भंवर सिंह (देवगांव), देवव्रत सिंह (डोराई), प्रभाकरण सिंह (बिसुन्दनी), गजेन्द्र सिंह (सुनारिया), जयदीप सिंह (गोयला), चन्द्रवीर सिंह (कनोज) तथा गोपाल सिंह (पिपरोली) सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन, वरिष्ठ नागरिक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।