रियासत काल में निर्मित गढ़,मन्दिर,बावड़ियों,चबुतरो, टांकों के संरक्षण की जरूरत मरम्मत कर पुरातन धरोहर को बचाने की आवश्यकता

बूंदी- स्मार्ट हलचल|रियासत काल में आमजन को सुगमता से 24 घंटे पानी की सुलभता रहें इसलिए तलवास गांव में अलग-अलग जगह पर चार बावड़ियों का निर्माण करवाया हुआ है। इसके अलावा रतनसागर झील,अजीतगढ़ किले पर पानी के विशाल टांके निर्मित है। जिनमें सदैव पानी भरा रहता है। तलवास में रामबिलास बाग, माता का बाग, रतनसागर झील किनारे पत्थर के सुंदर चबुतरें निर्मित है, लेकिन लम्बी अवधि से मरम्मत के अभाव से जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं । लुहारपुरा बावड़ी के साथ ही धार्मिक आस्था का महादेव मंदिर है। लेकिन रियासत काल की इन धरोहरों की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं हैं। नालियों के गंदे पानी की उचित निकासी के अभाव में महादेव मंदिर सहित आसपास गन्दगी फैली रहती है। रियासत कालीन इन धरोहरों की मरम्मत आज तक नहीं हो पायी है।
तलवास की रियासत कालीन धरोहरों में गढ़, अजीतगढ़ किले पर मन्दिर, पानी के टांके, रतनसागर झील,बावड़ियां, चबुतरे हमारी विरासत है, इनके संरक्षण बाबत पूर्व में कितनी ही बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों को मामला संज्ञान में लाया गया, लेकिन पूर्व स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है।
लुहारपुरा में नालियों का गन्दा पानी निकासी हेतु नाला निर्माण करवाने की विशेष आवश्यकता है। तलवास को पर्यटन के क्षैत्र में विकसित करने में इन सभी धरोहरों का संरक्षण भी जरूरी है।