पौधे रोपे या रस्म निभाई? देखरेख के बिना तीन दिन में ही सूखे ‘उम्मीदों के पेड़’

खखरेरू/स्मार्ट हलचल|फतेहपुर शासन की ओर से चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जिलेभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है, लेकिन कई स्थानों पर पौधों की देखरेख न होने से अभियान की सफलता पर सवाल उठने लगे हैं। विजयीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कठारिया इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है।
ग्राम पंचायत में 10 से 12 जुलाई के बीच ग्राम प्रधान व सचिव की मौजूदगी में करीब 250 से 300 पौधे लगाए गए। इनमें नींबू, अमरूद जैसे फलदार तथा छायादार पौधे शामिल थे। ग्रामीणों को पौधे वितरित कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए भी प्रेरित किया गया।
वहीं, खेलकूद मैदान में लगाए गए अधिकांश पौधे रोपण के महज तीन दिन बाद ही सूखने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और नियमित देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण कई पौधे दम तोड़ चुके हैं। खुले स्थानों पर लगाए गए पौधों को न तो ट्री-गार्ड मिले और न ही उन्हें पशुओं से बचाने के इंतजाम किए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पौधों की नियमित निगरानी और संरक्षण नहीं किया गया तो शासन की महत्वाकांक्षी वृक्षारोपण मुहिम केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगी। उनका कहना है कि केवल पौधे लगाकर औपचारिकता पूरी करने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है तो पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? यदि समय रहते सिंचाई और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो अभियान के तहत लगाए गए हजारों पौधों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है।
इस संबंध में ग्राम सचिव अक्षय ने बताया कि ग्राम प्रधान से बात करके अवगत कराया जाएगा