Homeराजस्थानअलवरगायों की दुर्दशा: मेरी आत्मकथा

गायों की दुर्दशा: मेरी आत्मकथा

 एजाज़ अहमद उस्मानी

मैं एक गाय हूँ। स्मार्ट हलचल|वही गाय, जिसे कभी घर-आँगन की लक्ष्मी कहा जाता था, जिसकी आँखों में करुणा और शरीर में धैर्य बसता था। आज मैं सड़कों पर भटकती हुई अपनी ही कहानी सुनाना चाहती हूँ—क्योंकि मेरी चुप्पी को अब कोई नहीं सुनता।मैंने मनुष्य को पालना सिखाया। मेरे दूध से बच्चों की हड्डियाँ मजबूत हुईं, मेरे गोबर से खेत उपजाऊ बने, और मेरे मूत्र से औषधियाँ बनीं। जब तक मैं दूध देती रही, मैं परिवार की सदस्य थी। मेरे गले में घंटी थी, माथे पर स्नेह का हाथ। लेकिन जैसे ही मेरी थन सूखीं, मेरा मूल्य भी सूख गया। एक दिन मुझे गाड़ी में भरकर शहर की सीमा पर छोड़ दिया गया—बिना पूछे, बिना देखे।
अब मेरी दुनिया सड़कें हैं। प्लास्टिक की थैलियाँ मेरा भोजन बन गई हैं, जिनसे पेट भरता नहीं, बीमारियाँ भर जाती हैं। तेज रफ्तार गाड़ियाँ मेरे सींगों से नहीं, मेरे डर से टकराती हैं। कई बहनें दुर्घटनाओं में मर जाती हैं; कुछ भूख से, कुछ बीमारी से। कोई पूछता नहीं कि हमारी गलती क्या है—दूध न दे पाना?
मैं सुनती हूँ कि मेरे नाम पर नारे लगते हैं, बहसें होती हैं, कानून बनते हैं। पर क्या किसी ने मेरी आँखों में झाँककर मेरा दर्द पढ़ा है? मुझे संरक्षण नहीं, संवेदना चाहिए। मुझे पूजा नहीं, पालन चाहिए। गौशालाएँ बनती हैं, पर वहाँ जगह कम और संसाधन अधूरे हैं। खेतों में मशीनें आ गईं, पर मेरे लिए जगह नहीं बची।
मैं माँ हूँ—केवल बछड़े की नहीं, उस संस्कृति की भी जिसने मुझे सहारा कहा था। अगर मुझे सच में सम्मान देना है, तो जिम्मेदारी निभाइए। जब तक मैं जीवित हूँ, मेरी देखभाल कीजिए। मेरे लिए सुरक्षित आश्रय, स्वच्छ भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था कीजिए। प्लास्टिक का उपयोग कम कीजिए, सड़कों पर हमारी सुरक्षा के उपाय कीजिए।
मैं शिकायत नहीं, निवेदन कर रही हूँ। मेरी आँखों में अभी भी विश्वास है कि मनुष्य अपने वचन याद करेगा। अगर मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है, तो समझिए—मैं सिर्फ गाय नहीं, आपकी नैतिकता का आईना हूँ।

स्मार्ट हलचल न्यूज़ पेपर 31 जनवरी 2025, Smart Halchal News Paper 31 January 2025
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