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565 रजवाड़े खत्म किए, तो 6 लाख वीआईपी क्यों पैदा कर दिए?The princely states are gone, so why the VIP treatment?

महेन्द्र नागोरी

स्मार्ट हलचल|देश ने आज़ादी के बाद 565 राजे-रजवाड़ों को खत्म कर लोकतंत्र की नींव रखी थी, लेकिन आज वही लोकतंत्र सवालों के घेरे में खड़ा है—क्या हमने राजशाही खत्म की या उसे नए नाम से जिंदा रखा?
आज हालात यह हैं कि देश में 6 लाख से ज्यादा वीआईपी मौजूद हैं। लाल-नीली बत्ती, सरकारी बंगले, भारी सुरक्षा घेरा और विशेष प्रोटोकॉल—क्या यह सब आम नागरिक के हक़ की कीमत पर नहीं है?
जब आम आदमी घंटों लाइन में खड़ा रहता है, अस्पतालों में एंबुलेंस फंस जाती है और फाइलें महीनों धूल खाती हैं, तब वीआईपी मूवमेंट के नाम पर सड़कें खाली क्यों कराई जाती हैं? क्या लोकतंत्र में किसी की जान ज्यादा कीमती है?
सवाल यह भी है कि जिस बराबरी के लिए राजतंत्र हटाया गया था, वही बराबरी आज कहां गुम हो गई? क्या सत्ता बदलने के साथ सोच बदलना जरूरी नहीं था?
565 महाराजाओं की विदाई के बाद अगर 6 लाख नए ‘महाराजा’ खड़े हो गए, तो फिर फर्क क्या पड़ा? क्या यह लोकतंत्र है या नई किस्म की राजशाही? आम जनता आज यही सवाल पूछ रही है।

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