जितेन्द्र गौड़
लाखेरी – स्मार्ट हलचल|बून्दी जिले के उपखंड क्षेत्र में से निकल रहा मेगा हाईवे आम जनता और पुलिस के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। बात यूं है, कि एक्सप्रेस वे के भारी वाहन मेगा हाइवे पर रफ्तार भर रहे हैं। लाखेरी क्षेत्र में मेगा हाईवे इन दिनों अपने मूल उद्देश्य से भटककर अव्यवस्था और खतरे का दूसरा नाम बन चुका है। तेज और सुरक्षित यातायात के लिए बनाए गए इस हाईवे पर आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि एक्सप्रेस वे के भारी वाहन नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए मेगा हाइवे की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। परिणाम यह है कि घंटों तक जाम, यातायात ठप, एंबुलेंस और स्कूल बसें फँसी, पुलिस की साँसें फूली और आम जनता त्रस्त। 10–20 मिनट का सफर एक से दो घंटे की सज़ा बना हुआ है। कुस्तला से बूंदी–कोटा जाने का छोटा-सा सफर जहां पहले कुछ समय में पूरा हो जाता था, आज वहीं जाम के कारण डेढ़ घंटे तक खिंच रहा है। भारी वाहनों की मनमानी के चलते छोटी गाड़ियां, स्कूल बसें, दुपहिया और एंबुलेंस एक ही कतार में रेंगने को मजबूर हैं। यात्रियों का दर्द कभी-कभी तो कई किलोमीटरों लंबी लाइन लग जाती है रोज़ का कामकाज ठहर गया है।
जाम में दम तोड़ती एंबुलेंस, मरीजों की जान पर आफत
लाखेरी से बूंदी और कोटा रोज़ाना कई मरीज रेफर होते हैं, पर हाईवे की अव्यवस्था इनके लिए जानलेवा साबित हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कई बार एंबुलेंस 30 मिनट से 1 घंटे तक जाम में फँसी रहती है। गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते। एक परिजन की पीड़ा हम मरीज को समय पर कोटा नहीं ले जा पाए… रास्ता पूरी तरह बंद था। पुलिस की बेबसी अपराध छोड़ ट्रैफिक साफ करने में झोंका जा रहा है , पूरा स्टाफ
जहाँ पुलिस को कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में लगना चाहिए, उनकी ड्यूटी अब जाम हटाने में खप रही है। पुलिसकर्मी बताते हैं दिन में कई बार 2–3 घंटे तक सिर्फ जाम खोलने का काम करना पड़ता है। भारी वाहन ड्राइवर नियम मानने को तैयार नहीं। धूप, धूल और शोर में खड़े होकर ट्रैफिक संभालना मुश्किल।
स्कूल बसें फँसी, बच्चे रोज़ देर से स्कूल पहुंच रहे हैं। सुबह 8–10 बजे और दोपहर 2–4 बजे स्थिति सबसे भयावह हो जाती है। बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुँच रहे कई बार परीक्षा वाले दिनों में भी बसें जाम में अटकीं रहती है। अभिभावकों का आरोप
हमारे बच्चे रोज़ 20–25 मिनट एक ही जगह खड़े रहते हैं… किसी को जिम्मेदारी समझ नहीं आ रही है।
ग्रामीण और व्यापार भी प्रभावित, दूध, सब्ज़ी और सामान की सप्लाई ठप
दूध के वाहन देरी से पहुंचने लगे सब्ज़ी–फल सप्लाई प्रभावित।
रोडवेज बसें अनियमित। लोकल बाजारों में भीड़ और देरी का असर। व्यापारी बताते हैं डिलीवरी वाहन समय पर नहीं आते, व्यापार चौपट हो रहा है। हाईवे प्रबंधन पर ग्रामीणों का आरोप प्रशासन पूरी तरह उदासीन है। ग्रामीणों ने हाईवे प्रबंधन पर खुलेआम आरोप लगाए एक्सप्रेस वे के वाहनों को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं चेतावनी बोर्ड, संकेतक और बैरिकेडिंग गायब किसी भी तरह का ट्रैफिक गाइडेंस सिस्टम नहीं कई जगह हाईवे अधूरा और खराब हालत में है। लोगों ने चेतावनी दी अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो हम चक्का जाम करेंगे। हाईवे अधिकारियों का खुद का स्वीकार मेंटेनेंस जाम में फँसकर अधूरा रह जाता है
मेगा हाईवे प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल कुमार बोले जब भी मशीनरी लेकर मेंटेनेंस करने पहुँचते हैं, भारी वाहनों की गलत दिशा में आवाजाही से तुरंत जाम लग जाता है। काम शुरू होने से पहले ही बंद करना पड़ जाता है।
भारतमाला प्रोजेक्ट मैनेजर संजय अग्रवाल की साफ टिप्पणी हम शटडाउन देकर काम पूरा कर सकते हैं, पर शर्त यही कि बड़े वाहन अपनी निर्धारित लेन में चलें। गलत दिशा और अवैध प्रवेश पूरी व्यवस्था ठप कर देता है।
स्थानीय जनता की मांगें प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए
1. एक्सप्रेस वे वाले वाहनों को उनकी निर्धारित लेन पर अनिवार्य किया जाए।
2. मेगा हाइवे पर भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद हो।
3. मेगा हाईवे कंपनी की जवाबदेही तय की जाए।
4. ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त टीमें तैनात हों।
5. चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और गाइडेंस सिस्टम लगाया जाए।
6. अधूरे हाईवे के हिस्सों को तुरंत पूरा किया जाए।













