भीषण गर्मी का तांडव: शीतल पेय की शरण में आम जन, खेतों में पसीना बहा रहे किसान और गोपालक

(बद्री लाल माली)
गुरला:-स्मार्ट हलचल|राजस्थान में सूरज के तीखे तेवरों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अप्रैल के महीने में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। भीषण गर्मी और लू (हिटहेव) के थपेड़ों से बचने के लिए लोग अब जतन करने में जुटे हैं।
*शीतल पेय की मांग में भारी उछाल*
शहरों और कस्बों के बाजारों में अब सन्नाटा पसरने लगा है, लेकिन ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए गन्ने का रस, शिकंजी, छाछ, और लस्सी जैसे शीतल पेय का सहारा ले रहे हैं। मिट्टी के घड़ों और सुराहियों की बिक्री भी जोरों पर है, क्योंकि लोग प्राकृतिक रूप से ठंडे पानी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खेतों में ‘फूलों’ की खुदाई और किसानों की मशक्कत
भयंकर गर्मी के बावजूद अन्नदाता विश्राम नहीं कर रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों, विशेषकर गुरला भीलवाड़ा जैसे क्षेत्रों में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती पर जोर दे रहे हैं।
*कार्य: किसान वर्तमान में फूलों की फसल की खुदाई और देखरेख में लगे हुए हैं।चुनौती:*

बढ़ते तापमान के कारण फूलों के पौधों के झुलसने और कीटों के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है। किसान मल्चिंग और नियमित सिंचाई के जरिए अपनी मेहनत को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
गोपालकों के सामने खाखला प्रबंधन की चुनौती
पशुपालकों (गोपालकों) के लिए यह समय परीक्षा की घड़ी जैसा है। गर्मी के कारण हरे चारे की कमी होने लगी है, जिससे पशुओं के लिए खाखला (सूखा चारा) का प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।
*स्टॉक की चिंता:* गोपालक आने वाले महीनों के लिए खाखला और तूड़ी का स्टॉक करने में जुटे हैं ताकि चारे के संकट से बचा जा सके।
*सावधानी:* पशुपालन विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर पशुओं को छायादार स्थानों पर रखने और उन्हें दिन में 3-4 बार ठंडा पानी पिलाने की सलाह दी है।
भीषण गर्मी में फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए इन विशेषज्ञों की सलाह देखें:
*पशु चिकित्सा गुरला पशुधन सहायक मनिषा राठोड़*