जयपुर 12 अप्रैल। स्मार्ट हलचल|राजस्थान पुलिस के ध्येय वाक्य आमजन में विश्वास को चरितार्थ करते हुए अजमेर जिला पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में अपनी तत्परता और मानवीय संवेदना का अनूठा उदाहरण पेश किया है। एक तरफ जहां पुलिस के एक जांबाज चालक ने अपनी जान जोखिम में डालकर आनासागर झील में डूबते बुजुर्ग को बचाया, वहीं दूसरी ओर एक सजग कांस्टेबल ने 80 सीसीटीवी कैमरों की मदद से एक महिला का खोया हुआ कीमती बैग बरामद कर उसे वापस लौटाया।
*देवदूत बनकर आए कांस्टेबल मानसिंह*
पहली घटना 9 अप्रैल की है, जब पंचशील निवासी एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग व्यक्ति घरेलू विवाद से व्यथित होकर आत्महत्या के इरादे से आनासागर झील में कूद गए। इसी दौरान वहां से गुजर रहे पुलिस कांस्टेबल चालक मानसिंह (बेल्ट नंबर 1728) की नजर उन पर पड़ी। मानसिंह ने बिना एक पल गंवाए अदम्य साहस का परिचय दिया और वर्दी की मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए झील के गहरे पानी में छलांग लगा दी। उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत जवाहर लाल नेहरू अस्पताल पहुँचाकर उनका उपचार कराया। इसके बाद परिजनों को सूचना देकर बुजुर्ग को उनके सुपुर्द किया गया।
*80 कैमरों की मदद से बरामद किया बैग*
दूसरी घटना 8 अप्रैल की है, जब जोधपुर से अपने पीहर अजमेर पहुंची हीना नामक महिला का बैग भूलवश ई-रिक्शा में ही छूट गया था। महिला ने तुरंत रामगंज थाने पहुँचकर इसकी सूचना दी। थानाधिकारी प्रोबेशनर आरपीएस दीपेन्द्र सैनी के निर्देशन में कांस्टेबल मनीष शर्मा ने तुरंत मोर्चा संभाला। मनीष शर्मा ने प्रभावी कार्यप्रणाली का परिचय देते हुए शहर के विभिन्न मार्गों पर लगे लगभग 80 सीसीटीवी कैमरों का गहन अवलोकन किया और ई-रिक्शा को चिन्हित किया। ई-रिक्शा यूनियन से संपर्क कर रेलवे स्टेशन पर खड़ी रिक्शा से बैग बरामद किया गया। बैग में रखा सामान पूरी तरह सुरक्षित पाकर महिला भावुक हो गई और पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया।
*एसपी ने नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र से बढ़ाया हौसला*
अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला ने पुलिसकर्मियों के इन दोनों साहसिक और कर्तव्यनिष्ठ कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। एसपी ने कांस्टेबल मानसिंह और कांस्टेबल मनीष शर्मा, दोनों की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें 2100-2100 रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने कर्तव्यों का निष्ठा, ईमानदारी और तत्परता से निर्वहन करने वाले पुलिस कार्मिकों को भविष्य में भी इसी प्रकार प्रोत्साहित किया जाता रहेगा। पुलिस की इन दोनों कार्रवाइयों ने न केवल दो परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, बल्कि समाज में पुलिस की छवि को और अधिक विश्वसनीय और मददगार बनाया है।
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