Thursday, May 21, 2026

अमेरिका इजरायल ईरान युद्ध का सड़क निर्माण पर असर

(पंकज पोरवाल)

डामर-सीमेंट के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा बजट, थमने लगी निर्माण की रफ्तार

*अंतरराष्ट्रीय बाजार संकट के चलते यूआईटी के निर्माण कार्यों पर पड़ा असर, राहत हेतु उठी आवाज*

भीलवाड़ा नगर विकास न्यास में ठेकेदार एसोसिएशन का निवेदन, नियमों में नहीं मिली ढील, तो अधूरे रहेंगे शहर के सपने

भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा में यूआईटी कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन द्वारा नगर विकास न्यास के सचिव को एक महत्वपूर्ण निवेदन पत्र सौंपा गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई अस्थिरता और वैश्विक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्यों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई। कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नियमों में आवश्यक संशोधन और दरों में राहत नहीं दी गई, तो कई परियोजनाएं अधूरी रह सकती हैं। उनका कहना है कि वर्तमान दरों पर काम करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है, जिससे ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पत्र में बताया गया कि पश्चिमी देशों में चल रहे युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, डामर, गिट्टी आदि की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे निर्माण कार्यों की लागत पहले से काफी बढ़ गई है और ठेकेदारों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने यह भी उल्लेख किया कि कोरोना काल में भी कार्यों की समय सीमा बढ़ाई गई थी, इसलिए वर्तमान वैश्विक संकट को देखते हुए पुनः निर्माण कार्यों की समय सीमा में वृद्धि की जानी चाहिए। इसके साथ ही 50 लाख रुपये से कम लागत वाले तथा तीन माह या उससे कम अवधि वाले कार्यों में रेट एस्केलेशन का प्रावधान नहीं होने के कारण ठेकेदारों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे कार्यों में अतिरिक्त समय देने और शिथिलता बरतने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने निवेदन किया है कि छोटे निर्माण कार्यों को अनुबंध की धारा 32 के तहत विशेष राहत देते हुए पूर्ण कराया जाए, ताकि ठेकेदारों के हितों की रक्षा हो सके और कार्य भी सुचारू रूप से पूर्ण हो सकें। एसोसिएशन अध्यक्ष चांदमल सोमानी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियां किसी सामान्य देरी का परिणाम नहीं, बल्कि एक वैश्विक संकट का हिस्सा हैं। ऐसे में न्यास को अपनी कार्यशैली में बदलाव करते हुए अनुबंध की धारा 32 के तहत कार्यों की समीक्षा करने या अतिरिक्त समय प्रदान करने जैसे कदम उठाने होंगे, ताकि संवेदकों को वित्तीय मलबे से बचाकर निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सके। विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए अब प्रशासनिक सहयोग और नीतिगत शीतलता ही एकमात्र विकल्प नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो शहर के विकास कार्यों पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ेगा। कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आमजन को मिलने वाली सुविधाओं में भी देरी होगी। प्रशासन से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वह ठेकेदारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए व्यावहारिक समाधान निकाले, ताकि विकास कार्यों की गति दोबारा पटरी पर लौट सके।