टोंक से सनसनीखेज खुलासा-मरीजों की सेहत से खिलवाड़-जनाना अस्पताल में खराब दूध-दलिया में घी की कटौती-जिम्मेदार कौन?

शिवराज बारवाल मीना
टोंक । स्मार्ट हलचल|टोंक जिला मुख्यालय के राजकीय सआदत एवं जनाना अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिए जा रहे पोषाहार में गंभीर अनियमितताओं का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।यह मामला सीधे तौर पर मरीजों की सेहत और सरकारी व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
*खराब दूध से मरीजों की जान खतरे में*
जानकारी के अनुसार, मरीजों को वितरित किया गया दूध बेहद खराब गुणवत्ता का था। दूध को गर्म करते ही वह फट गया, जिससे साफ जाहिर होता है कि सप्लाई किया गया दूध एक्सपायरी या निम्न स्तर का था। यह लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।
*दलिया में घी की भारी कटौती*
पोषाहार में सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि दलिया में डाले जाने वाले घी में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। नियमानुसार उपयोग 80 किलो देसी घी/माह निर्धारित मात्रा हैं, जबकि वास्तविक उपयोग केवल 20 किलो मात्र हैं। यह अंतर भ्रष्टाचार या गंभीर लापरवाही की ओर साफ संकेत देता है।
*पुराना मामला, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था*
सूत्रों के मुताबिक, 2018-19 में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है, लेकिन उसके बावजूद आज तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदारों को संरक्षण मिल रहा है?
*सप्लायर और प्रशासन दोनों पर सवाल*
अधिकृत डेयरी होते हुए भी बाहर से घटिया दूध की सप्लाई
अधिक मुनाफे के लिए गुणवत्ता से समझौता, अस्पताल प्रशासन की चुप्पी। ये सभी बिंदु प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका को मजबूत करते हैं।
*जनता के तीखे सवाल*
क्या मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी?, जिम्मेदार अधिकारियों और सप्लायर पर कब गिरेगी गाज?, क्या जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच करेगा?
*प्रशासन से सख्त मांग*
तुरंत सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, अस्पताल प्रशासन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, पोषाहार गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग हो, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
*निष्कर्ष*
यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ गंभीर खिलवाड़ है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?