जनप्रतिनिधि व नेता वादे करके भूल जाते है ग्रामीण क्षेत्र के वाशिंदे टूटी फूटी सड़को का दंश झेलने को मजबूर

किशन खटीक

रायपुर  l, 17 अप्रैल को होने जा रहे उपचुनाव का बिगुल बज चुका है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदे आज भी टूटी फूटी डामर की सड़कों पर प्रतिदिन शहर की तरफ आने का दंश झेल रहे हैं। कोट से मोखुंदा वाया खाखरमाला की ओर जाने वाला पक्का सड़क मार्ग जगह-जगह से इतना क्षतिग्रस्त हो चुका है कि पैदल चलने वाला भी 50 कदम चल कर जवाब देने लग जाता है। मार्ग में जगह-जगह इतने गड्ढे हो गए हैं कि इस मार्ग पर गुजरने वाला दोबारा आने की हिम्मत नहीं जुटा सकता। सभी दलों के प्रत्याशी इस मार्ग पर चुनाव प्रचार करने बार बार चले आ रहे हैं लेकिन इन भोले भाले ग्रामीणों का दर्द दूर करने की कोई जहमत नहीं उठा रहा है। जनप्रतिनिधि विकास की डींग हांक रहे हैं लेकिन ग्रामीणों का वास्तविक दर्द कोई पहचानने वाला नहीं मिल रहा है। बस सभी यही कहते हैं चुनाव जीतने दो उसके बाद आपकी प्रत्येक समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। लेकिन हकीकत तो यह है कि चुनाव के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की सुध लेने नहीं आता है। सुध लेना तो दूर चुनाव जीतने के बाद इन्हें पहचाना तक भूल जाता है।