!! !!
खेड़ारामपुर. स्मार्ट हलचल|भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित अनुसुचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत आयोजित मधुमक्खीपालन पर 02 दिन का प्रशिक्षण दिनांक 22 फरवरी 2026 से 23 फरवरी 2026 तक कृषि अनुसंधान केन्द्र उम्मेदगंज पर आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में कोटा एवं बून्दी जिले 40 युवा प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। इत्त प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं में मधुमक्खीपालन के प्रति दक्षता विकसित करके रोजगारोन्मुखी बनाना है जिससे कि यह नघुमक्खीपालन अपनाकर अपनी आय बढ़ा सके। प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय कुलगुरु डॉ. विमला सुरुवाल में बताया कि स्वस सहायता समूह बनाकर मधुमक्खीपालन करके तथा शहद प्रसंस्करण करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इस दौरान
निदेशक अनुसन्धान डी एम सी जैन ने कहा कि
मधुमक्खीपालन एक नवोन्मेसी व्यवसाय है जिसको अपनाकर अपनी आय बड़ा सकते हैं।
डॉ. बी. एस. मीणा ने प्रशिक्षणार्थियों को क्षेत्रिय स्तर पर मधुमक्खीपालन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए इसे आत्मर्निभरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. आर. के बैरवा ने मंच संचालन करते हुए फसलों की उपज बढ़ाने में मधुमक्खिया भूमिका के बारे में बताया।
मधुमक्खीपालन परियोजना प्रभारी डॉ. हरिप्रसाद मेघवाल ने इस दौरान बताया कि भूमिहीन कृषक भी मधुमक्खीपालन अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। प्रगतिशील कृषक युधिष्ठिर चॉदसी ने बताया कि समूह बनाकर मधुमक्खीपालन को आजीविका का साधन बनायेंगे। इस अवसर वैज्ञानिक डॉ. ज्योति केंवर ने सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।










