उदयपुर एवं सलूंबर जिले के 664 संकुल संदर्भ केन्द्रों को राज्य सरकार,द्वारा 64.30 लाख रुपये का बजट स्वीकृत

उदयपुर, 5 अगस्त
स्मार्ट हलचल|राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा के प्रसार, सरकारी विद्यालयों की प्रभावी मॉनिटरिंग और नामांकन में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत उदयपुर एवं सलूंबर जिले में शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए 664 संकुल संदर्भ केन्द्रों (सीआरसी) के संचालन हेतु 64.30 लाख रुपये का कुल बजट स्वीकृत किया गया है।

समग्र शिक्षा उदयपुर के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक कुंज बिहारी भारद्वाज ने बताया कि राज्य की वार्षिक योजना के तहत उदयपुर जिले के 497 पीईईओ को इस मद में राशि स्वीकृत की गई थी जबकि शाला दर्पण पोर्टल पर वर्तमान में 506 पीईईओ के अस्तित्व में होने पर राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर के निर्देशानुसार पीएबी में स्वीकृत राशि को समानुपातिक रूप में 506 सीआरसी को जारी किया गया है इसी प्रकार सलूंबर जिले में भी 146 के स्थान पर 158 सीआरसी को राशि जारी की गई है।

योजना के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समग्र शिक्षा के प्रभारी एपीसी राजेंद्र प्रसाद नायक ने बताया कि इस मद के सुचारू संचालन के लिए स्वीकृत कुल बजट की 50 प्रतिशत राशि के तहत उदयपुर जिले प्रत्येक सीआरसी को 9822 रुपए तथा सलूंबर जिले के प्रत्येक सीआरसी को 9240 रुपए की प्रथम किश्त आज बुधवार को जिला कार्यालय द्वारा जारी कर दी गई है। जिला स्तर से स्वीकृति जारी होने के बाद अब नियमानुसार ब्लॉक द्वारा पीईईओ स्तर पर राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। इस राशि को स्टेशनरी, फोटोकॉपी, दूरभाष, इंटरनेट, शाला दर्पण और आरटीई पोर्टल फीडिंग जैसे कार्यों के साथ ही शैक्षणिक नवाचारों पर चर्चा, टीएलएम निर्माण कार्यशाला और समीक्षा बैठकों में कार्मिकों के अल्पाहार व राजकीय नियमानुसार यात्रा भत्ते के लिए व्यय किया जा सकेगा।

एडीपीसी भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि बजट राशि का उपयोग पूर्णतः पारदर्शिता के साथ और समय सीमा में करना अनिवार्य होगा। इसके लिए तीन चरण निर्धारित किए गए हैं:
जिसके अनुसार जुलाई से सितम्बर: आवंटित बजट का 40 प्रतिशत,अक्टूबर से दिसम्बर: बजट का 30 प्रतिशत तथा जनवरी से 15 फरवरी तक: शेष 30 प्रतिशत राशि का उपयोग
किया जाना है।
उन्होंने सचेत किया कि चरणबद्ध रूप से समय सीमा में राशि का उपयोग नहीं किए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।