नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जाति संबंधी नियम स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञ को भाषा और स्पष्ट करने को कहा गया है। फिलहाल यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में 2012 के पुराने रेगुलेशंस ही लागू रहेंगे। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 पर कोर्ट की रोक देशभर में चल रहे विरोध के बीच आई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में जातिगत-भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए यूजीसी के नए ‘कानून’ का एकतरफा बताया जा रहा है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अंलकार अग्निहोत्री ने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया है। वहीं सवर्ण जाति संगठनों ने आंदोलन तेज करने की धमकी दी है। 13 जनवरी से चल रहे विरोध के बाद यूजीसी जल्द स्पष्टीकरण जारी कर सकती है। सरकार शिक्षाविद, अधिकारी और यूजीसी को मिलाकर एक हाईलेवल कमेटी बना सकती है। यूजीसी ‘इक्विटी एक्ट 2026’ की ताजा जानकारी के लिए यहां दिए जा रहे अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं।
कोर्ट ने फिर से लागू किया पुराना 2012 का नियम
सुप्रीम कोर्ट ने UGC 2026 इक्विटी नियम के लागू होने पर रोक लगाते हुए पुराने 2012 नियम फिर से लागू कर दिए हैं। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2012 सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि दखल देना जरूरी था क्योंकि नई गाइडलाइंस समाज को बांट सकती थीं और अगर इस स्टेज पर इन्हें लागू किया जाता तो इसका गंभीर असर हो सकता था।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, दिया ये सुझाव
कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाने की मांग वाली दलीलों को स्वीकार किया, सॉलिसिटर जनरल से उनका जवाब मांगा, और कहा कि नियमों के कुछ पहलुओं पर और जांच की जरूरत है। बेंच ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार उठाई गई चिंताओं की समीक्षा के लिए जाने-माने विद्वानों और विशेषज्ञों की एक समिति बनाने पर विचार कर सकती है।
हमें अमेरिका की तर्ज पर ‘नस्लीय भेदभाव’ की ओर नहीं बढ़ना चाहिए: SC
यूजीसी के नए नियम पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या हम पीछे की ओर जा रहे हैं। क्या 75 साल की संवैधानिक प्रगति के बाद भी समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके। क्या भारत बढ़ने के बजाय उल्टी दिशा में जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में भारत की एकता दिखनी चाहिए। अमेरिका से तुलना करते हुए बेंच ने कहा कि भारत को अमेरिका के ‘नस्लीय आधार’ पर अलग-अलग स्कूलों जैसी व्यवस्था की ओर नहीं बढ़ना चाहिए, जहां छात्रों को पहचान के आधार पर बांटा जाता था।
यूजीसी के नए नियम का गलत इस्तेमाल हो सकता है- सुप्रीम कोर्ट
SC का कहना है कि ये नियम पहली नजर में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। SC ने केंद्र सरकार से नियमों को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है। कोर्ट ने कहा – ‘हम जनरल कैटेगरी की शिकायतों पर विचार नहीं कर रहे हैं। हमारी चिंता यह है कि आरक्षित समुदाय के सदस्यों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली लागू रहनी चाहिए।’
यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की 7 बड़ी बातें
29 जनवरी को यूजीसी के नियम पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये 7 बड़ी बातें कहीं हैं-
- UGC नए आदेश तक 2012 के नियम लागू रहेंगे।
- यह कोई बहुत बड़ा संवैधनिक मामला नहीं है।
- नियमों को दुरुपयोग हो सकता है।
- विशेषज्ञ इसकी भाषा स्पष्ट करें।
- भेदभाव की परिभाषा और समावेशी होनी चाहिए।
- 2026 रेगुलेशन की भाषा अस्पष्ट है।
- जाति संबंधी नियम स्पष्ट नहीं।













