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यूनिवर्सिटी चेयरपर्सन आरडी मीणा के परिवार की ऐतिहासिक और निर्णायक पहल, केदार बाई ने अलोदा में विद्यालय हेतु दान की 2 बीघा भूमि

राकेश मीणा

कोटा |स्मार्ट हलचल| शिक्षा के क्षेत्र में साहसिक और मिसाल कायम करने वाला कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त, दूरदर्शी और समाज को झकझोर देने वाला कदम उठाते हुए जय मिनेश आदिवासी यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन R.D. Meena की पत्नी ने ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा देने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती केदार बाई ने अपने पैतृक गांव अलोदा में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए 2 बीघा भूमि दान कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी शिक्षा है, और शिक्षा से बड़ा कोई दान नहीं।*

*यह दान केवल जमीन नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों की बुनियाद, समाज के विकास की रीढ़, और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। इससे विद्यालय के भवन, कक्षाओं और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुलेगा, वहीं ग्रामीण बच्चों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा।*

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और समाजसेवियों ने इस कदम को क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बताया। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि जो समाज शिक्षा को प्राथमिकता देता है, वही प्रगति की दौड़ में आगे रहता है।

आरडी मीणा के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी पहले से ही आदिवासी समाज में शिक्षा, जागरूकता और सशक्तिकरण की मजबूत अलख जगा रही है। उनके परिवार का यह भूमि दान उसी सामाजिक संकल्प का विस्तार है, जो शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराता है।

ग्रामीणों ने केदार बाई के इस कार्य को सिर्फ दान नहीं, बल्कि एक चुनौती और प्रेरणा बताया — कि अगर हर सक्षम व्यक्ति शिक्षा के लिए आगे आए, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

शिक्षा का दान — सबसे बड़ा दान।
केदार बाई का यह कदम — समाज के लिए चेतावनी भी, प्रेरणा भी, और नई दिशा भी।

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