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मेड़ता सिटी में मूंग खरीद पर बवाल: राजफेड केंद्रों पर किसानों का विरोध तेज, 23–25 फरवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी

एजाज़ अहमद उस्मानी

मेड़ता सिटी — स्मार्ट हलचल|न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की खरीद में हो रही देरी और गुणवत्ता के नाम पर हो रहे “रिजेक्शन” के विरोध में किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। RAJFED (राजफेड) के खरीद केंद्रों पर किसान लगातार धरना दे रहे हैं। उनका आरोप है कि तुलाई के लिए स्लॉट कम दिए जा रहे हैं और वेयरहाउस में माल उतारने की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल है, जिसके कारण कई किसान पिछले 8–10 दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अपनी उपज लेकर इंतजार कर रहे हैं।
मूंग खरीद में गतिरोध, ‘रिजेक्शन’ पर सवाल
किसानों का कहना है कि गुणवत्ता जांच के नाम पर फसल को खारिज किया जा रहा है, जबकि उपज मानकों के अनुरूप है। देरी के कारण मंडी परिसर में लंबी कतारें लग रही हैं। बढ़ती धूप और बदलते मौसम के बीच खुले में खड़ी उपज खराब होने का खतरा भी किसानों को सता रहा है।
किसान संगठनों ने मांग की है कि:
तुलाई के लिए प्रतिदिन आवंटित स्लॉट की संख्या बढ़ाई जाए,
गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पारदर्शी और मानकीकृत की जाए,
वेयरहाउस में माल उतारने की व्यवस्था सरल व तेज की जाए।

*प्रशासन से वार्ता की कोशिशें*

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और स्लॉट प्रबंधन में सुधार पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर अभी तक ठोस बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।

*राष्ट्रीय स्तर पर असर: चौथे दौर की वार्ता आज*

इधर, केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच विभिन्न मांगों को लेकर 18 फरवरी को चौथे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। इस वार्ता का असर मेड़ता सहित पूरे उत्तर भारत की मंडियों पर पड़ रहा है। किसान संगठनों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक समाधान निकलता है, तो स्थानीय स्तर पर भी खरीद प्रक्रिया में सुधार की राह खुलेगी।

*आगे की रणनीति: 23–25 फरवरी को बड़ा आंदोलन*

किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो 23 से 25 फरवरी के बीच बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसमें आसपास के गांवों और अन्य मंडियों के किसान भी शामिल हो सकते हैं।

*दिनभर तनाव पूर्ण रहा वार्ता का दौर*

मेड़ता में बुधवार का दिन प्रशासनिक वार्ताओं, खरीद व्यवस्था की अनिश्चितता और मौसम की चिंता के बीच तनावपूर्ण बना हुआ है। किसानों की निगाहें एक ओर स्थानीय प्रशासन की कार्रवाइयों पर हैं, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली वार्ता के नतीजों पर। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह विरोध शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ता है या व्यापक आंदोलन का रूप लेता है।

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