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यूपीएससी के सचिव शशि रंजन ने अपने ख़िलाफ़ दायर अवमानना याचिका में कोर्ट में लगायी प्रार्थना

जयपुर, पंकज चौधरी,आईपीएस द्वारा दायर अवमानना याचिका में यूपीएससी सचिव की बढ़ी मुश्किलें।

बूंदी/ जयपुर – स्मार्ट हलचल|राजस्थान कैडर के 2009 बैच के चर्चित आईपीएस पंकज चौधरी पुनः चर्चा में है।हाल यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार,आईएएस के ख़िलाफ़ दायर अवमानना याचिका ने यूपीएससी सचिव की मुश्किलें बढ़ा दी है।शशि रंजन ने अपने वकील के ज़रिए कोर्ट में जवाब भेजा है और अवमानना ना चलाए जाने के लिए प्रार्थना किया है।

पंकज चौधरी कार्य व ईमानदारी के लिए जाने जाते है।इस कड़ी में उनका विवादों ने भी पीछा नहीं छोड़ा।सर्विस से बाहर होने पर मजबूती से अपना पक्ष कोर्ट में रख पुनः सेवा में आए चौधरी ने पुनः अपने रूख से सभी को अचंभित किया है।केंद्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार,यूपीएससी व राज्य सरकार को कोर्ट के निर्णय के अधीन पंकज चौधरी को सर्विस में बहाल करने के साथ सभी अनुलाभ दिए जाने थे।कुछ अधिकारियों की व्यक्तिगत कुंठा व लापरवाही से प्रकरण में तीन वर्ष से अधिक समय में कोर्ट के निर्देश के अनुरूप निर्णय नहीं लिए गए और फाइल राज्य सरकार से होती हुई यूपीएससी व गृह मंत्रालय भारत सरकार घूमती रही।अंततः पंकज चौधरी ने कोर्ट में DIG प्रमोशन की वर्ष 2024 मार्च महीने में याचिका दाखिल किया।बजाय प्रमोशन दिए जाने के राज्य सरकार ने विधि विरुद्ध व कोर्ट के निर्णय के विपरीत जाते हुए डिमोशन का आदेश फरवरी 2025 में तत्कालीन कार्मिक सचिव केके पाठक,आईएएस ने निकाल दिया, जिसकी देशभर में आलोचना हुई और पंकज चौधरी से इस आदेश को चुनौती दी और 16 मई 2025 को कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर स्थगन जारी कर दिया।इधर DIG के प्रमोशन पर याचिका में भी राज्य सरकार ने अनावश्यक देरी कर दिया।जिस आईपीएस को 2009 में DIG का प्रमोशन मिल जाना चाहिए था वो राज्य सरकार व यूपीएससी के अधिकारियों की लापरवाही से विलंबित हो गया।सूत्र बताते है की वर्ष 2012 बैच के आईपीएस जहाँ 1 जनवरी 2026 को DIG का प्रमोशन पा जाएँगे वही पंकज चौधरी के प्रकरण ने राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों की लापरवाही व कुंठा से एक ईमानदार व मजबूत अधिकारी के प्रमोशन को अटका दिया।इस कड़ी में यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार,आईएएस को जारी अवमानना याचिका और सचिव द्वारा प्रार्थना पत्र ने प्रशासनिक गलियारे में हलचल पैदा की दी है।

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