(शीतल निर्भीक ब्यूरो)
वाराणसी।स्मार्ट हलचल|पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर स्थित महाप्रबंधक सभाकक्ष में 11 फरवरी 2026 को सुरक्षा और जिम्मेदारी का अनूठा सम्मान देखने को मिला, जब महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने वाराणसी मंडल के दो सजग रेलकर्मियों को ‘सेफ्टी स्टार ऑफ द मंथ’ घोषित कर नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि उस सतर्कता का प्रतीक है जिसने संभावित बड़ी रेल दुर्घटनाओं को होने से पहले ही रोक दिया। पहली घटना 07 दिसम्बर 2025 की है, जब वाराणसी स्टेशन पर गाड़ी प्रबंधक/माल के पद पर तैनात योगेन्द्र सिंह अपनी नियमित ड्यूटी पर थे। प्लेटफार्म संख्या-01 पर निरीक्षण के दौरान उनकी नजर टूटी हुई पटरी पर पड़ी। स्थिति बेहद गंभीर थी और यदि समय रहते ध्यान न जाता तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था। योगेन्द्र सिंह ने बिना देर किए तत्काल स्टेशन मास्टर को सूचना दी, जिसके बाद रेल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पटरी की मरम्मत कराई और एक संभावित दुर्घटना को टाल दिया। उनकी सजगता ने यह साबित कर दिया कि जिम्मेदार कर्मचारी ही सुरक्षा की असली ढाल होते हैं। दूसरी घटना 04 दिसम्बर 2025 की है, जब बनारस कोचिंग डिपो में तकनीशियन के पद पर कार्यरत सर्वेश तिवारी गाड़ी संख्या 12559/60 के अनुरक्षण कार्य में जुटे थे। निरीक्षण के दौरान कोच संख्या 223648 में एयर स्प्रिंग के बैलोज से लीकेज और स्प्रिंग में कम प्रेशर पाया गया। यह तकनीकी खामी आगे चलकर डिटैचमेंट या बड़ी विफलता का कारण बन सकती थी। सर्वेश तिवारी ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत अपने पर्यवेक्षक को सूचित किया, जिसके बाद संबंधित कोच को रेक से अलग कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की गई और संभावित दुर्घटना को टाल दिया गया। दोनों कर्मचारियों की सूझबूझ, कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित निर्णय क्षमता की सराहना करते हुए मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने उन्हें बधाई दी और कहा कि सुरक्षा के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता ही रेलवे की साख को मजबूत बनाती है। जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि ‘सेफ्टी स्टार ऑफ द मंथ’ योजना का उद्देश्य कर्मचारियों में संरक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है। वाराणसी मंडल के इन दोनों कर्मियों ने यह साबित कर दिया कि रेल संचालन की सुरक्षा केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि उन सजग निगाहों पर भी निर्भर करती है जो हर छोटी से छोटी गड़बड़ी को समय रहते पहचान लेती हैं। उनकी तत्परता ने न केवल एक बड़ी दुर्घटना को रोका, बल्कि हजारों यात्रियों के विश्वास को भी सुरक्षित रखा।

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