वस्त्र नगरी भीलवाड़ा: 500 उद्योग, 1 लाख श्रमिक, 30 हजार करोड़ का सालाना टर्नओवर

बिजली दरें और श्रमिकों की कमी बड़ी चुनौती, सांसद बोले- मेगा टेक्सटाइल पार्क जल्द, एक्सपोर्ट 6000 करोड़ पार

पवन बावरी

भीलवाड़ा। वस्त्र उद्योग के नाम से विश्व पटल पर पहचान रखने वाला भीलवाड़ा आर्थिक रूप से मजबूत तो है, लेकिन बिजली की बढ़ती दरें और श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। इसके बावजूद भीलवाड़ा का उद्योग 1 लाख से अधिक श्रमिकों के लिए रोजगार का साधन बना हुआ है।

भीलवाड़ा में लगभग 500 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इनमें 300 वीविंग, 100 गारमेंट्स, 50 प्रोसेसिंग, 22 प्रोसेस हाउस, 16 स्पिनिंग मिल और 20 डेनिम प्लांट शामिल हैं। शहर में प्रतिमाह 10 करोड़ मीटर कपड़ा बनता है। यार्न का मासिक उत्पादन 60 हजार टन और वार्षिक टर्नओवर 30,000 करोड़ से ज्यादा है।

*एक्सपोर्ट में भीलवाड़ा अव्वल*

भीलवाड़ा का एक्सपोर्ट 6000 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें 2000 करोड़ का एक्सपोर्ट फाइन काउंट कॉटन का है। वैश्विक हालातों के बावजूद भीलवाड़ा की क्वालिटी की तारीफ हर देश में होती है।

*रोजगार का बड़ा केंद्र*

भीलवाड़ा के उद्योगों से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों के लोग जुड़े हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा रोजगार मिल रहा है।

*सांसद ने बताई प्राथमिकता*

भीलवाड़ा सांसद एवं टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष दामोदर अग्रवाल ने कहा कि भीलवाड़ा भारतीय औद्योगिक इकाई में पांचवें नंबर पर है। “यहां प्रदूषण दूसरी इंडस्ट्री की तुलना में बहुत कम है। उद्यमी पर्यावरण का भी खास ध्यान रख रहे हैं। बिजली दरों में राहत को लेकर हमने सरकार तक बात पहुंचाई है। मेवाड़ टेक्सटाइल पार्क को लेकर केंद्र को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। स्वीकृति मिलते ही भीलवाड़ा को मेगा टेक्सटाइल पार्क की सौगात मिलेगी”।

उद्यमियों की मांग है कि राज्य और केंद्र सरकार सोलर प्लांट और बिजली दरों में रियायत दे, ताकि उद्योग की समस्याओं का निस्तारण हो सके।

“पिछड़ा माना जाने वाला भीलवाड़ा अब विश्व पटल पर” : सांसद दामोदर अग्रवाल

भीलवाड़ा सांसद एवं टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष दामोदर अग्रवाल ने कहा कि किसी जमाने में भीलवाड़ा पिछड़ा माना जाता था, लेकिन आज वह कालखंड में कई आगे निकल चुका है।

अग्रवाल ने कहा कि आज भीलवाड़ा अपनी अलग पहचान रखता है। आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी भीलवाड़ा पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भीलवाड़ा का उद्यमी निरंतर प्रयास करता है और आज पूरे विश्व पटल पर क्वालिटी को लेकर अपनी अलग पहचान रखता है।

उद्योग का धर्म है समाज के साथ खड़ा रहना, तभी भीलवाड़ा बना मैनचेस्टर ऑफ इंडिया” : मनीष चांडक

उद्योगपति मनीष चांडक ने कहा कि उद्यमी होने के नाते हमारा यह धर्म है कि समाज के हर वर्ग के लिए उद्योग हमेशा खड़ा रहे, चाहे वह सरकार हो, हमारे कामगार हों या व्यापारी।

उन्होंने कहा कि हमने बातचीत और सूझबूझ से हर मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का साथ देकर उद्योग को बढ़ावा दिया है। उसी का परिणाम है कि भीलवाड़ा आज ‘मैनचेस्टर ऑफ इंडिया’ बना है।

“हमारा प्रयास रहता है कि सभी लोगों को एक साथ जोड़कर उनके विकास के लिए काम करें और उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। इसके लिए हमारा प्रयास निरंतर बना रहता है,” चांडक ने कहा।

उद्योगपति विजय अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की कमी के चलते सरकार को विचार करना चाहिए। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार शिविर के माध्यम से लोगों को सीधे औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए।

अग्रवाल ने कहा कि इससे औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की कमी पूरी होगी और ग्रामीणों को रोजगार मिल सकेगा। यदि सरकार इस पर संज्ञान लेती है तो ग्रामीण क्षेत्र के कई किसानों समेत लाखों लोगों को उद्योग से जुड़कर रोजगार मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि निरंतर श्रमिकों की कमी से औद्योगिक क्षेत्र पर असर दिख रहा है। भीलवाड़ा में कुछ नई छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां खुली हैं, जहां काफी श्रमिकों की कमी है।

अग्रवाल ने मांग की कि सरकार संज्ञान लेकर औद्योगिक इकाइयों के साथ मिलकर गांवों में रोजगार शिविर लगाए, जिससे लोगों को सीधे उद्योग क्षेत्र से जुड़ने का मौका मिल सके।

उद्योगपति सुनील मेहता ने कहा कि भीलवाड़ा में गारमेंट्स का उद्योग भी निरंतर आगे बढ़ रहा है और धीरे-धीरे प्रगति कर रहा है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री ने भी भीलवाड़ा का दौरा किया था। उस दौरान उद्योग में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए कई बार मांग पत्र सौंपे गए हैं। सरकार उन पर काम कर रही है और जल्द ही संज्ञान लिए जाने की उम्मीद है।

मेहता ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र की छोटी-मोटी समस्याओं के निस्तारण के लिए केंद्र सरकार को मांग पत्र सौंपा जा चुका है। भीलवाड़ा के उद्योगपति दिल्ली और राज्य सरकार को भी कई बार अवगत करवा चुके हैं।

“समस्याओं का असर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है, लेकिन भीलवाड़ा का उद्योग आर्थिक रूप से मजबूत है और आगे बढ़ रहा है। यह उद्योगों की कार्यशैली का परिणाम है कि भीलवाड़ा का नाम विश्व पटल पर हो रहा है,” मेहता ने कहा।

टेक्सटाइल फेडरेशन के उपाध्यक्ष बोले- क्वालिटी निखर रही, अलग पहचान बनी

टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेमचंद गर्ग ने कहा कि हमारी औद्योगिक इकाइयां क्वालिटी के बेस पर पूरे विश्व भर में व्यापार कर रही हैं।

गर्ग ने कहा कि हमारी क्वालिटी को निखारा जा रहा है और अलग पहचान दिख रही है, जिस पर हमें गर्व है। आने वाले समय में भीलवाड़ा कपड़े की क्वालिटी में नंबर वन स्थान प्राप्त करेगा।