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वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के लिए अब सरकार देगी 50 प्रतिशत अनुदान, जानिए पूरी जानकारी

 

कठूमर क्षेत्र में लगेंगे 10 यूनिट वर्मी कंपोस्ट

कठूमर । दिनेश लेखी

कठूमर। स्मार्ट हलचल/वर्तमान समय में खेती में रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में लगातार कमी आ रही है। लगातार रासायनिक खेती से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकुल असर पड़ रहा है। और लोग‌ गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे है‌। इसलिए सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए भारी अनुदान देने की योजना शुरू की है।

किसानो के लिए जैविक खेती कम लागत पर उत्पादन बढ़ाने का एक अच्छा उपाय माना जाता है। मिट्टी के साथ जैविक खाद भी मनुष्य के लिए अच्छा है।

वर्मी कंपोस्ट यूनिट पात्रता

वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापना हेतु किसान के पास न्यूनतम 0.4 हेक्टेयर भूमि एक ही जगह पर होनी चाहिए।।

जगह का आकार
30 फुट लंबी ×8 फुट चौड़ी × 2.5 फुट गहरी होनी चाहिए । छाया के लिए लगाया जाने वाला शेड बीच में जमीन से कम से कम 10 फुट ऊंचा और किनारों पर 8 फुट ऊंचा होना चाहिए

आवश्यक दस्तावेज
0.4 हेक्टेयर
जमीन की जमाबंदी जो 6 माह पुरानी नहीं हो

अनुदान
प्रति किसान 50% या अधिकतम 50 हजार जो भी कम हो

आवदेन
किसान आवदेन राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन ई मित्र या स्वयं के द्वारा कर सकता है।

वर्मी कम्पोस्ट क्या है:-
वर्मी कंपोस्ट को केंचुआ पालन भी कहा जाता है। गोबर, सुखे एवं हरे पत्ते, घास फूस, धान व बाजरे, मक्का में बाजरे की कड़वी खेतों के अवशेषों, डेहरी ,कुकक्ट अपक्षय , कूड़ा करकट इत्यादि खाकर केंचुआ द्वारा प्राप्त माल से तैयार खाद्य वर्मी कल्चर कहलाती है। वर्मी कंपोस्ट डेट से दो महीने के अंदर तैयार हो जाता है। इसमें ढाई से 3% नाइट्रोजन डेढ़ से 2% सल्फर तथा डेट से 2% पोटाश पाया जाता है। कंपोस्ट खाद के लाभ खाद का उपयोग कार्बन के योग के माध्यम से मिट्टी की संरचना में सुधार करने और पौधों को पोषक तत्व प्रदान करने के लिए किया जाता है। नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पौधे के पोषक तत्वों का स्रोत होने के अलावा यह मिट्टी के भौतिक रासायनिक और जैविक गुण में सुधार करता है।

वर्मी कंपाउंड के फायदे:-
वर्मी कंपोस्ट से मिट्टी की उर्वरता बढती है पोषक तत्व जलधारण, कार्मिक पदार्थ की मात्रा, जीवाणुओं की संख्या भी बढ़ती है, फसलों की पैदावार में वृद्धि होती है वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों का खतरा कम होता है। मिट्टी में खरपतवार काम उगते हैं और पौधों में भी रोग काम होते हैं।

 

इनका क्या कहना

वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा पचास फीसदी अनुदान पर योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना में इच्छुक लोग किसान पोर्टल पर आन लाइन आवेदन कर सकेंगे। शुरुआती चरण मे कठूमर क्षेत्र में दस लोगों को योजना का फायदा मिलेगा। योजना में पहले आओ , पहले पाओ के आधार पर फायदा मिलेगा।
दिगम्बर सिंह सहायक कृषि अधिकारी कठूमर व दीपक शर्मा सुपरवाइजर कृषि विभाग कठूमर

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