पीपलू ।स्मार्ट हलचल|स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कुरेड़ा की सरकारी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आए एक कथित वीडियो ने पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि सरकारी स्कूल परिसर में 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान वोट मांगने जैसी गतिविधि की गई। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्कूल में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।15 अगस्त देश की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इस दिन सरकारी विद्यालयों में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि वास्तव में वोट मांगने से संबंधित है, तो यह मामला जांच का विषय बन गया है।
वायरल वीडियो के बाद उठे कई सवाल
वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं। लोगों का कहना है कि क्या सरकारी स्कूल परिसर का इस्तेमाल किसी तरह के राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा सकता है? यदि स्कूल में वोट मांगने या किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार जैसी गतिविधि हुई, तो इसकी अनुमति किसने दी?
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में मौजूद स्कूल प्रशासन, शिक्षक और अन्य जिम्मेदार लोगों की इस मामले में क्या भूमिका रही।
बच्चों के सामने राजनीतिक संदेश देने पर भी सवाल
सरकारी स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहते हैं। ऐसे में राजनीतिक गतिविधि या वोट मांगने का आरोप और भी गंभीर माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल का वातावरण शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रचार के लिए।
हालांकि वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधि की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिक्षा विभाग से जांच की मांग
मामले को लेकर अब लोगों की नजर शिक्षा विभाग और प्रशासन पर है। ग्रामीणों का कहना है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 15 अगस्त के सरकारी कार्यक्रम के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
यदि जांच में सरकारी स्कूल परिसर में राजनीतिक प्रचार या वोट मांगने की बात सही पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल— सरकारी स्कूल में आखिर वोट क्यों?
15 अगस्त के दिन जब बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति का संदेश दे रहे थे, उसी दौरान सरकारी स्कूल परिसर से कथित तौर पर वोट मांगने का वीडियो सामने आना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
अब सवाल सिर्फ वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की निष्पक्षता और मर्यादा का भी है। आखिर सरकारी स्कूल परिसर में ऐसी गतिविधि कैसे हुई और इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंची या नहीं—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
