पेपर लीक से लेकर तकनीकी धांधली और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए इस बार मध्य प्रदेश में 38 साइबर कमांडो परीक्षा की डिजिटल निगरानी करेंगे

स्मार्ट हलचल|नीट-यूजी परीक्षा पर इस बार पुलिस का डिजिटल पहरा रहेगा। पेपर लीक से लेकर तकनीकी धांधली और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए इस बार मध्य प्रदेश में 38 साइबर कमांडो परीक्षा की डिजिटल निगरानी करेंगे। सर्वर से लेकर डार्कवेब और इंटरनेट मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर बारीक नजर रखी जाएगी। परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाहों पर भी यह डिजिटल फोर्स निगाह रखेगी। पहली बार प्रदेश में यह प्रयोग होने जा रहा है, जब साइबर कमांडो किसी परीक्षा की निगरानी करेंगे।

283 केंद्रों पर होगी परीक्षा

बता दें कि पूरे प्रदेश में 283 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। तीन मई को यह परीक्षा होगी। इसमें करीब 1.18 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। ग्वालियर में भी दो साइबर कमांडो तैनात किए गए हैं। यह ग्वालियर और चंबल में परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगाह रखेंगे। ग्वालियर और चंबल के परीक्षा केंद्रों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। इसकी वजह यह है कि पूर्व में यहां से दूसरी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, इसलिए यहां के परीक्षा केंद्रों पर अधिक फोकस है

NEET-UG परीक्षा में इस बार सुरक्षा को लेकर एक नया कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश में 38 साइबर कमांडो तैनात किए जा रहे हैं, जो परीक्षा के दौरान डिजिटल निगरानी संभालेंगे। इसका उद्देश्य है कि किसी भी तरह की ऑनलाइन पेपर लीक, हैकिंग या डिजिटल धोखाधड़ी को तुरंत रोका जा सके।

डिजिटल पहरेदारी के मुख्य पहलू

  • साइबर कमांडो तैनाती
    • ये कमांडो परीक्षा केंद्रों और डिजिटल नेटवर्क पर निगरानी रखेंगे।
    • संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों को तुरंत ट्रैक और ब्लॉक किया जाएगा।
  • AI और CCTV निगरानी
    • परीक्षा केंद्रों पर कैमरे और AI आधारित सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
    • असामान्य गतिविधियों पर तुरंत अलर्ट मिलेगा।
  • डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम
    • प्रश्नपत्र वितरण और सर्वर एक्सेस पर डिजिटल लॉग रखा जाएगा।
    • किसी भी अनधिकृत एक्सेस की पहचान तुरंत हो सकेगी।

भारत के लिए महत्व

यह कदम दिखाता है कि भारत अब चीन और अमेरिका जैसी डिजिटल सुरक्षा तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।

  • चीन में Gaokao परीक्षा के दौरान AI निगरानी और सिग्नल जैमर का प्रयोग होता है।
  • अमेरिका में MCAT जैसी परीक्षाएँ पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित होती हैं।