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विज्ञान के छात्रों का कुंभलगढ़ का शैक्षणिक भ्रमण, कुंभलगढ़ में वन संपदा और जैव विविधता का अध्ययन

भीलवाड़ा । संगम यूनिवर्सिटी, भीलवाड़ा के बी.एससी. तथा एम.एससी. संकायों के कुल 35 विद्यार्थियों का कुंभलगढ़ क्षेत्र में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण में डीन-इंचार्ज डॉ. गुणमाला गुगलिया, डॉ. मनोज जोशी, डॉ. रीना मोदी तथा जयंत शर्मा ने सहभागिता की। इस संपूर्ण शैक्षणिक यात्रा का नेतृत्व डॉ. शाहदाब हुसैनद्वारा किया गया।भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सबसे पहले आसपास के वन क्षेत्र का अवलोकन किया, जहाँ उन्हें विभिन्न वनस्पतियों, जंगली पौधों एवं औषधीय पौधों के महत्व व उपयोगिता की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने प्रत्यक्ष रूप से जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय वनस्पतियों की पारिस्थितिकी को समझा। डॉ. हुसैन ने यह भी समझाया कि पौधों का संग्रहण करते समय नैतिक और वैज्ञानिक विधि अपनाना अत्यंत जरूरी है—जैसे कि पौधे की केवल आवश्यक भाग का नमूना लेना, जड़ों को अनावश्यक रूप से न खोदना, परिपक्व पत्तियों/फूलों का चयन करना तथा संग्रहित नमूनों को सही लेबलिंग और प्रेसिंग तकनीक से हर्बेरियम के लिए तैयार करना।उन्होंने पौध संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जंगली पौधे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं—ये जल, मिट्टी और जैव विविधता को संतुलित रखते हैं।इसके बाद विद्यार्थियों ने कुंभलगढ़ क्षेत्र स्थित फिश पॉइंट का निरीक्षण किया। यहाँ डॉ. मनोज जोशी द्वारा मछलियों के जीवन चक्र, प्रजनन प्रक्रियाओं और जल पारिस्थितिकी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गईं। विद्यार्थियों ने जलीय जीवों के संरक्षण तथा उनके पर्यावरणीय महत्व को विस्तार से समझा।इस अवसर पर डीन-इंचार्ज डॉ. गुणमाला गुगलिया ने शैक्षणिक भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की फील्ड विज़िट विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाती हैं और उन्हें शोध एवं पर्यावरण संरक्षण की ओर प्रेरित करती हैं।
समापन में विद्यार्थियों ने इस भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। संगम यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ, पर्यावरणीय जागरूकता और व्यवहारिक शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

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