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अलीगढ़ थाने में दर्ज प्रकरण के वांछित आरोपी का पीसी रिमांड नहीं लेने के नाम पर थानाधिकारी ने मांगी थी 20 हजार की रिश्वत-एसीबी ने दर्ज किया केस

शिवराज बारवाल मीना

– जानलेवा हमले के प्रकरण में एक वांछित आरोपी से थानाधिकारी ने सिपाही के मार्फत मांगी थी बीस हजार की रिश्वत-6 युवकों पर नामजद था मामला,

– एसीबी सवाई माधोपुर में शिकायत के बाद सत्यापन पाया था सही-भनक लगने पर ट्रैप कार्यवाही हुई थी विफल,

– अलीगढ़ के पूर्व थानाधिकारी और कॉन्स्टेबल के खिलाफ एसीबी ने केस दर्ज कर शुरू की जांच

टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|जिले के उनियारा सर्किल अन्तर्गत अलीगढ़ पुलिस थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी उप निरीक्षक (सितम्बर 2025) द्वारा थाने के एक कांस्टेबल कर्मवीर सिंह चौधरी के मार्फत अगस्त 2024 के मारपीट कर जानलेवा हमले के 6 नामजद आरोपियों में से एक वांछित आरोपी से 20000 (बीस हजार) की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। यह राशि तत्कालीन थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी द्वारा पुलिस थाने पर पीसी रिमांड में मारपीट नहीं करने और सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाने के नाम पर मांगी गई थी। जिस पर वांछित आरोपी के भाई द्वारा एसीबी सवाई माधोपुर में रिश्वत मांगने की शिकायत सितम्बर महीने में दर्ज करवाई गई थी। शिकायत के दिन ही एसीबी द्वारा सत्यापन किया गया तो परिवादी की शिकायत सही होना पाया गया, जिस पर एसीबी टीम द्वारा आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी अलीगढ़ सहित एक कांस्टेबल को ट्रैप करने की योजना बनाई गई, लेकिन भनक लगने पर करीब तीन बार ट्रैप कार्यवाही असफल रही। जानकारी अनुसार उक्त भ्रष्ट आचरण का आरोपी तत्कालीन अलीगढ़ थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी छुट्टियां काटकर गायब भी रहा और मामला जिला पुलिस के सामने आने पर आरोपी कांस्टेबल को लाइन हाजिर किया गया, जिसे अब निलंबित कर दिया गया है। एसीबी कार्यालय सवाई माधोपुर द्वारा उक्त प्रकरण में कार्यवाही को लेकर विस्तृत रिपोर्ट एसीबी मुख्यालय जयपुर को भेजी गई। जहां से ट्रैप कार्यवाही के सत्यापन की रिकॉर्डिंग के आधार पर विशेषज्ञ टीम की अनुशंसा के आधार पर एसीबी द्वारा आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी सहित एक कॉन्स्टेबल के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला नए साल की शूरूआत पर दर्ज हुआ है।
आपको बता दे चले कि एसीबी के अनुसार अलीगढ़ थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी (सब इंस्पेक्टर) और कॉन्स्टेबल कर्मवीर सिंह चौधरी के खिलाफ एसीबी मुख्यालय जयपुर में 20 हजार रूपए की रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है, जिसकी जांच शुरू कर दी है। प्रकरण में करीब 4 महीने पहले अलीगढ़ थाने में मारपीट जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए वांछित आरोपी के साथ थाने में पीसी रिमांड में मारपीट नहीं करने, सुख सुविधाएं देने आदि की एवज में उसके परिजनों से स्वयं थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी द्वारा 20000 (बीस हजार) की राशि लेने की डिमांड की गई थी। हालांकि 9 सितम्बर 2025 को परिवादी की शिकायत के आधार पर सवाई माधोपुर एसीबी टीम ने करीब 4 महीने पहले इन दोनों पुलिसकर्मियों को रिश्वत की मांग करने पर रंगे हाथों पकड़ने के लिए ट्रैप की असफल कार्रवाई की थी, आरोपियों को भनक लगने व शक होने पर तीन बार एसीबी की कार्यवाही नहीं हो पाई थी। जिसके बाद एसीबी ने विस्तृत रिपोर्ट जयपुर एसीबी मुख्यालय भेजी। उसके बाद एसीबी मुख्यालय जयपुर में नये साल की एक जनवरी 2026 को अलीगढ़ थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी (सब इंस्पेक्टर) और कॉन्स्टेबल कर्मवीर चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

——– थाने पर पीसी रिमांड में मारपीट नहीं करने के नाम पर मांगी थी रिश्वत राशि ———
गौरतलब है कि करीब 16 महिने पूर्व अगस्त 2024 में अलीगढ़ थाना क्षेत्र के पचाला में पावर हाउस के पास रास्ता रोककर आधा दर्जन करीब युवकों द्वारा रास्ता रोककर मारपीट, फायरिंग कर बाईक सवार के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया था। जिसके 6 नामजद आरोपियों में फरार चल रहे एक वांछित आरोपी को अलीगढ़ थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जहां आरोपी के साथ अलीगढ़ थाने में पुलिस द्वारा पीसी रिमांड में मारपीट नहीं करने और सुख सुविधा उपलब्ध करवाने के नाम पर तत्कालीन अलीगढ़ थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी ने 20 हजार रूपए की रिश्वत मांगी थी।
——— आरोपी के भाई ने एसीबी को दी जानकारी ——–
पुलिस द्वारा रिश्वत मांगने की जानकारी आरोपी के परिजनों तक पहुंचाई गई और तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी ने बताया गया कि रिश्वत की यह राशि थाने के कॉन्स्टेबल कर्मवीर चौधरी को देनी है। लेकिन गिरफ्तार किए गए आरोपी के भाई ने इसकी शिकायत एसीबी सवाई माधोपुर में की। वहां से शिकायत का सत्यापन करवाया गया तो वह सही मिली। फिर एसीबी सवाई माधोपुर की टीम ने तत्कालीन अलीगढ़ थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी
और कॉन्स्टेबल को रंगे हाथों गिरफ्तार करने का प्लान बनाया।
——— ट्रेप की कार्रवाई की-लेकिन शक होने पर असफल रही कार्यवाही ——–
सवाई माधोपुर एसीबी टीम 10 सितंबर 2025 और 13 व 14 सितंबर 2025 को भ्रष्ट आचरण के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी और कॉन्स्टेबल को कर्मवीर चौधरी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करने के लिए ट्रैप की कार्रवाई करने परिवादी को साथ लेकर अलीगढ़ थाने पहुंचे, लेकिन तत्कालीन थानाधिकारी व सिपाही को इसकी भनक लगने के बाद ट्रैप की कार्रवाई असफल रही। फिर इस पूरे मामले विस्तृत रिपोर्ट एसीबी की टीम ने जयपुर एसीबी मुख्यालय भेज दी। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने तत्कालीन अलीगढ़ थानाधिकारी और कॉन्स्टेबल के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला एसीबी मुख्यालय जयपुर में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी अनुसार प्रकरण में उक्त दोनों पुलिसकर्मियों के अलावा अन्य पुलिस व दलालों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
——– आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी की अवैध बजरी परिवहन के वायरल ऑडियो में भी संदिग्ध भूमिका आई थी सामने ——-
वहीं अलीगढ़ थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी के अलीगढ़ रहने के दौरान नवंबर महीने में अवैध बजरी परिवहन के मामले में भ्रष्ट आचरण के एक हैड कांस्टेबल सत्यप्रकाश जाट के दो ऑडियो वायरल होने पर उसमें भी थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी की भूमिका सामने आई थी, जिसमें भी करीब एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच होना बताया जा रहा है, लेकिन अवैध बजरी परिवहन की सांठगांठ के ऑडियो वायरल होने के बावजूद भी आरोपियों के विरूद्ध आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जो कार्यवाही नहीं होना पुलिस अधिकारियों की कार्य प्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।
——-इनका हैं कहना :——-
उक्त प्रकरण में जानकारी लेने पर पुलिस अधीक्षक टोंक राजेश कुमार मीणा ने बताया कि एसीबी मुख्यालय से सूचना मिलते ही आरोपियों पर कार्रवाई करेंगे। एसपी ने बताया कि पिछले साल नंवबर महीने में सब इंस्पेक्टरों के तबादले हुए थे। उसमें पवन कुमार चौधरी को अलीगढ़ से मालपुरा थाने लगाया था, फिर वहां से अजमेर में लगा दिया गया। वहीं कॉन्स्टेबल कर्मवीर चौधरी को ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर पुलिस लाईन भेज दिया है। अभी इनके खिलाफ एसीबी में मामला दर्ज होने की अधिकृत जानकारी नहीं मिली है। जैसे ही एसीबी से प्रकरण दर्ज होने का आदेश आते ही नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

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