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अपने आज के लिए ईश्वर नहीं, हम स्वयं ही उत्तरदाई हैं,we ourselves are responsible

@”अपने आज के लिए ईश्वर नहीं, हम स्वयं ही उत्तरदाई हैं” we ourselves are responsible


– राजकुमार जैन

स्मार्ट हलचल/इस भूलोक पर हमारा जन्म क्यों और कैसे हुआ है इस प्रश्न का उत्तर अभी भी अनुत्तरित ही है। लेकिन अपने जन्म के बाद से बीतते समय के साथ माता-पिता, परिजन, मित्र, परिचित, अपरिचित आदि हर किस्म के हमसे मिलने वाले, टकराने वाले व्यक्ति हमें भांति भांति के अनुभव निरंतर प्रदान करते हैं। इन अनुभवों को हम अपनी अपेक्षा और समझ अनुसार दो श्रेणियों में विभाजित करते हैं कुछ खट्टे तो कुछ मीठे। लेकिन यह निश्चित है कि इनके साथ बीता हुआ हर एक पल हमें कुछ ना कुछ सीखाकर ही जाता है।


यूं तो औपचारिक शिक्षा, समय बिताने और अन्य कारणों से हम बहुत कुछ किसी और के द्वारा लिखा हुआ पढ़ते है। लेकिन जीवन यात्रा में मिले हमारे अपने निजी अनुभवों से मिली शिक्षा किसी किताब के पन्नों पर नहीं लिखी गई है। वस्तुत: जिंदगी में मिली इन व्यवहारिक सीखों से ही परत दर परत हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है।


##हमने समाज की स्थापित परंपरा के अनुसार औपचारिक शिक्षण के दौरान किताबों में जो पढ़ा उसकी परीक्षा में भी बैठना पड़ा। उस परीक्षा के परिणाम में नम्बर यानि अंक या ग्रेड मिले। इन नंबरों के आधार पर व्यवस्था द्वारा कभी हमें असफल बताया तो कभी सफल उदघोषित किया गया। जिसके चलते हम कभी प्रसन्न हुए तो कभी उदास हुए। यह परिणाम तय करते हैं कि हम अगली कक्षा के लिए उपयुक्त हैं या अगला कदम रखने से पहले इसी कक्षा में रुक कर परीक्षा पुनः देनी होगी। औपचारिक शिक्षा व्यवस्था में फेल होने पर सुधार करने के लिए पुनः परीक्षा देने का विकल्प होता है।


@इसी तरह इस जीवन की यात्रा में मिले अनुभवों से हम जो ग्रहण करते हैं उसकी परीक्षा भी निरंतर देना होती है। परम पिता परमात्मा हमारा परीक्षण निरंतर करता है और कई बार तो ये परीक्षाएं बगैर किसी पूर्व तैयारी के अचानक देनी होती है, स्प्लिट सैकंड में विकल्प चुनना होता है। इन परीक्षाओं में हमारे प्रदर्शन के बारे में सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि इनके परिणाम स्वरूप कोई अंकसूची नहीं मिलती, कोई प्रोग्रेस कार्ड नहीं मिलता।लेकिन इन परीक्षाओं के परिणाम की सत्यता को सिर्फ़ हम ही महसूस कर पाते है। इन परीक्षाओं के परिणाम हमारी नजर में जो भी हो हम जिंदगी के अगले पड़ाव पर यानी अगली कक्षा में पहुंच जाते हैं। इस यात्रा में प्रत्येक परीक्षा के बाद हमें आगे का रास्ता चुनने की स्वतंत्रता मिलती है। जो हम अपने विवेक अनुसार चुनते हैं और आगे चलते जाते हैं। मानव जीवन की इस यात्रा में ठहरने का विकल्प नहीं होता है, आयु निरंतर बढ़ती जाती है।


$$इस जीवन यात्रा में आज हम जहां भी पहुंचे है वो हमारे अपने निर्णयों और हमारे कर्मों का ही फल है। हम सफल हैं या असफल यह हमारे अपने विचारों और कर्मों का ही प्रतिफल है। अपने आज के लिए हम स्वयं ही उत्तरदाई हैं। बीते हुए प्रत्येक पल में हमारे द्वारा किए गए कर्म हमारे आने वाले पल की नींव रखते है।




                                              बदलते परिवेश के साथ युवा पीढ़ी को अब आगे आना होगा,Young generation with changing environment

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