ध्रुव राठी की हिरासत ने दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। इस मामले में मुख्य मुद्दे हैं—मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार।
ध्रुव राठी के साथ क्या हुआ?
10 अक्टूबर 2026: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से पहले ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित उनके घर से पुलिस ने हिरासत में लिया।
पुलिस का पक्ष: प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली थी और सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध लागू थे।
ध्रुव राठी का आरोप: उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी बिना वारंट उनके घर आए, उन्हें जबरन ले गए और वकील से संपर्क करने का अवसर नहीं दिया। उन्होंने इस कार्रवाई को “किडनैपिंग” कहा।
- रिहाई: उन्हें 10 अक्टूबर की देर रात रिहा कर दिया गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि हिरासत की घटना की समाचार रिपोर्टों से पुष्टि होती है, लेकिन इसे कानूनी अर्थ में अपहरण साबित करने वाला कोई न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
दिल्ली में प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख आपत्तियाँ हैं कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
इस विरोध के दौरान दिल्ली में 2,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट आई। 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनावश्यक प्रतिबंध हटाने तथा मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं को सुचारु रखने के संबंध में निर्देश भी दिए।
ध्रुव राठी का मामला इतना चर्चा में क्यों आया? उनकी हिरासत ने प्रदर्शन की मांगों के साथ-साथ पुलिस की कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस को भी तेज कर दिया। हालांकि, उनकी हिरासत से अपने आप यह साबित नहीं होता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें पकड़ने का आदेश दिया था।