आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ lस्मार्ट हलचल|आज एक तरफ आसमान में चाँद के दीदार के लिए छलनी थामे सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की दुआएं मांग रही हैं, तो दूसरी तरफ लोकतंत्र के इस महासंग्राम,पंचायती राज चुनावों में कहानी बिलकुल पलट चुकी है ! यहाँ तस्वीर दिलचस्प भी है और सियासी भूचाल लाने वाली भी । व्रत भले ही पत्नियों ने पतियों के सुहाग की लंबी उम्र के लिए रखा हो, लेकिन पंचायत की सरकार में विकास की उम्र लंबी करने और राजनीति की लंबी पारी खेलने के लिए मैदान में खुद महिलाएँ डटी हुई हैं!
*व्रत पत्नी का, धुकधुकी पतियों की!*
जहाँ एक ओर करवा चौथ का पावन व्रत अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर हमारी महिला प्रत्याशी पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर, बल्कि कई कदम आगे बढ़कर पंचायत की कमान संभालने का हुंकार भर रही हैं।
हालात यह हैं कि इस बार असली व्रत और तपस्या भले ही पत्नियों ने की हो, लेकिन दिल की धुकधुकी और राजनीतिक सरगर्मी पतियों की बढ़ी हुई है! गाँवों में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। 50% महिला आरक्षण और भागीदारी के इस दौर में महिला प्रत्याशी चौपालों से लेकर गलियों तक धूल फाँक रही हैं, प्रचार में जुटी हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने पारंपरिक और पारिवारिक दायित्वों से पीछे नहीं हटी हैं।
*उस ‘प्यारे चाँद’ की विडंबना, जो दाँव पर लगा चुका है सब कुछ!*
ज़रा उस ‘प्यारे चाँद’ (पतिदेव) की बेबसी और जोश की विडंबना तो देखिए! जो अपनी पत्नी को जीत का ऐतिहासिक ताज पहनाने के लिए गाँव-गाँव, डगर-डगर अपनी साख, प्रतिष्ठा और राजनीतिक वजूद सब कुछ दाँव पर लगा चुका है।
अब तक तो घरों में पुरुष ही सियासत के ठेकेदार हुआ करते थे, लेकिन इस बार चुनाव आयोग के सख्त पहरे और महिला सशक्तिकरण की बयार ने कई ‘प्रधानपतियों’ को पर्दे के पीछे या प्रचार रथ का सारथी बनने पर मजबूर कर दिया है।
*फैसला जनता की अदालत में*
यदि इन महिला प्रत्याशियों को चुनावी वैतरणी पार करने में सफलता मिलती है, तो यह जीत सिर्फ एक सीट का कब्जा नहीं, बल्कि पितृसत्तात्मक राजनीतिक समीकरणों पर एक करारा तमाचा और ऐतिहासिक सौगात होगी। हालांकि, किसकी राजनीतिक आयु लंबी होगी और किसके सिर सजेगा ताज, यह कहना अभी इसलिए जल्दबाजी है क्योंकि अभी ईवीएम का बटन दबना बाकी है और फैसला जनता की सर्वशक्तिमान अदालत में होना बाकी है !
फिर भी, करवा चौथ के इस पावन और सियासी रूप से बेहद गर्म अवसर पर, चित्तौड़गढ़ जिले की समस्त जुझारू महिला प्रत्याशियों और उनके उन समर्पित ‘चाँदों’ (पतियों) को हमारा सलाम… दुआ है कि आप और आपके दोनों चाँद—यानी जीवनसाथी रूपी चाँद और जीत का राजनीतिक मुकुट,हमेशा इसी तरह बुलंदियों पर चमकते रहें !