जब समाज उतरा मैदान में, बदल गई तस्वीर, श्रमदान से फिर मुस्कुराई शाहपुरा की विरासत

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल।कहते हैं कि इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि उन धरोहरों में भी सांस लेता है जिन्हें समाज अपने हाथों से संवारता है। और जब सेवा का संकल्प किसी शहीद की याद में लिया जाए तो वह केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जनआंदोलन बन जाता है। शनिवार को शाहपुरा में ऐसा ही एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जहां वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना कान जी का कुंड लोगों की सामूहिक मेहनत से फिर से जीवंत होता नजर आया।
यह वही कुंड है जो डंपिंग यार्ड के रास्ते पर स्थित है और लंबे समय से गंदगी, झाड़ियों और कचरे के बीच अपनी पहचान खोता जा रहा था। कभी रियासतकालीन गौरव का प्रतीक रहा यह ऐतिहासिक स्थल आज मानो अपनी बदहाली पर मौन आंसू बहा रहा था। लेकिन शनिवार को उसकी किस्मत बदलने का दिन था। कहीं कहा गया है कि किसी धरोहर को बचाने के लिए हमेशा बड़े बजट की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी कुछ संवेदनशील दिल, सेवा से भरे हाथ और अपनी मिट्टी से प्रेम ही इतिहास को फिर से जीवित कर देते हैं। यही सब साबित हुआ आज।

जब प्रशासन की चुप्पी के बाद समाज ने उठाई जिम्मेदारी-
शाहपुरा की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करना निश्चित रूप से प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन जब लंबे समय तक कोई पहल नहीं हुई तो जीव दया सेवा समिति के संयोजक अत्तू खां कायमखानी ने इस दर्द को अपना दर्द बना लिया। उन्होंने मीडिया के माध्यम से कई बार इस मुद्दे को उठाया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने निर्णय लिया कि शिकायतों से बेहतर समाधान है-श्रमदान। और फिर एक आह्वान हुआ, जिसने समाज के अनेक वर्गों को एक मंच पर ला खड़ा किया।

शहादत की स्मृति में सेवा का संकल्प-
शनिवार का दिन दादा कायम खां के 607वें यौमे-ए-शहादत का था। इस पावन अवसर को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रखते हुए उसे समाज सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया गया। मेवाड़ कायमखानी महासभा ने भी इस पुनीत अभियान में सहयोग का हाथ बढ़ाया। सुबह होते-होते कुंड परिसर में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और युवा एक-एक कर पहुंचने लगे। किसी के हाथ में फावड़ा था, किसी के हाथ में तसला और कोई कचरा उठाने के लिए बोरी लेकर आया था। यहां कोई पद बड़ा नहीं था, कोई पहचान छोटी नहीं थी। सभी का परिचय केवल एक था सेवाभाव।

मानो आसमान ने भी दिया साथ-
लोकमान्यता है कि नेक काम में ईश्वर स्वयं सहयोगी बन जाता है। शनिवार को यह बात सच होती दिखाई दी। जैसे ही श्रमदान शुरू होने वाला था, अचानक आसमान में बादल छा गए। हल्की बारिश की फुहारें पड़ीं और तपती गर्मी के बीच मौसम सुहावना हो गया। उपस्थित लोगों ने इसे प्रकृति का आशीर्वाद माना। बारिश थमते ही सभी लोग पूरे उत्साह से काम में जुट गए। कोई झाड़ियां काट रहा था, कोई वर्षों से जमा कचरा निकाल रहा था तो कोई उसे बाहर तक पहुंचाने में लगा था।

कुछ घंटों की मेहनत और बदल गई तस्वीर-
जिस कुंड का स्वरूप वर्षों से गंदगी के कारण छिप गया था, वह धीरे-धीरे अपनी वास्तविक पहचान वापस पाने लगा। श्रमदान करने वाले हाथ लगातार चलते रहे और देखते ही देखते परिसर साफ-सुथरा नजर आने लगा। कुंड के बाहर निकाले गए कचरे को तत्काल जेसीबी मशीन की सहायता से हटवाया गया, जिससे आसपास का क्षेत्र भी स्वच्छ हो गया। सफाई के बाद जब लोगों ने ऐतिहासिक कुंड को देखा तो सभी के चेहरे पर संतोष और गर्व की मुस्कान थी।

अब केवल सफाई नहीं, संरक्षण की भी तैयारी-
इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल सफाई नहीं रही, बल्कि इसके बाद कुंड के स्थायी संरक्षण और मरम्मत को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। उपस्थित लोगों ने इसके पुनरुद्धार के लिए सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया और भविष्य की योजना तैयार करने पर विचार किया।
यह पहल इस बात का संदेश देती है कि यदि समाज स्वयं अपनी विरासत की जिम्मेदारी उठाए तो ऐतिहासिक धरोहरें फिर से जीवंत हो सकती हैं।

समाज के अनेक वर्गों ने निभाई भागीदारी-
जीव दया सेवा समिति शाहपुरा एवं मेवाड़ कायमखानी महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस श्रमदान अभियान में हाजी चांद खान कायमखानी, महासभा के सचिव फिरोज खान कायमखानी, जीव दया सेवा समिति के संयोजक अत्तू खां कायमखानी, कायमखानी समाज के अध्यक्ष मुमताज खान कायमखानी, शौकत खान हुसैनखानी, फिरोज खान दिलावरखानी, पीसीसी सदस्य संदीप महावीर जीनगर, निवर्तमान पार्षद डॉ. मोहम्मद इशाक, सूफी चिराग खान कायमखानी, पूर्व कृषि अधिकारी नूर मोहम्मद, शिक्षाविद इस्माइल खान कायमखानी, गोरू खान भीमपुरा, हाजी उस्मान गनी सिलावट, हबीब खान दौलतखानी, पूर्व पार्षद रमेश व्यास, प्रभु सुगंधी, गोरू खान सामतखानी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अशोक भारद्वाज, सुरेंद्र सिंह राणावत, संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष राम प्रसाद पारीक, महासचिव एवं गीतकार सत्येंद्र मंडेला, आसिफ खान, डैनी खान, महावीर, शंकर लाल जाट, जीतमल धाकड़, अमन पांचाल, अक्षत पांचाल, आयुष पांचाल, सौरभ पांचाल, तेजु कुमावत, विष्णु कुमावत तथा उस्मान खान दौलतखानी सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।