मुकेश्या नंद महाराज और ‘भान’ का चक्रव्यूह
एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 11 — आकाश शर्मा
स्मार्ट हलचल |चित्तौड़गढ़, रावतभाटा, बेंगू, निम्बाहेड़ा, आकोला, बड़ीसादड़ी और कपासन नगर निकायों की मतगणना के पश्चात जिले की सियासी तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो चुकी है। चित्तौड़गढ़, बेंगू और निम्बाहेड़ा में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत के साथ परचम लहरा दिया है, वहीं आकोला, बड़ीसादड़ी और कपासन में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा है। रावतभाटा में मुकाबला कांटे का रहा, जहां दोनों दल बराबरी पर खड़े दिखे और आखिरकार निर्दलीयों ने बाजी अपने पाले में खींच ली।
इन चुनावी परिणामों की धुंध छंटते ही हमने तुरंत ‘बाबाजी’ का दरवाजा खटखटाया। बाबाजी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा, “वत्स! कल ही तो समझाया था तुम्हें कि जनता या तो विकास के पथ पर स्पष्ट जनादेश देगी या फिर त्रिशंकु की उलझन पैदा करेगी। जनता ने स्पष्ट बहुमत को तरजीह दी है और परिणाम तुम्हारे सामने हैं। अकेले चित्तौड़गढ़ में भाजपा ने 33, कांग्रेस ने 23 और 4 निर्दलीयों ने मैदान मारकर किला फतह कर लिया है।”
मैंने झट से सवाल दागा, “बाबाजी, आप मुझे जरा उस ‘पान का बीड़ा’, ‘काले चश्मे’ और… के रहस्य के बारे में बताइए ना !”
बाबाजी ने तनिक गंभीर होते हुए जवाब दिया, “अरे वत्स! भान के किले की दीवारें इतनी कमजोर नहीं कि कोई भी ऐरा-गैरा आकर सेंध लगा दे। यहां तो पान का बीड़ा, काला चश्मा और… ने ही काम आसान करते हुए शिकार का मार्ग प्रशस्त कर दिया। कहते हैं न ‘घर के भेदी लंका ढाएं’, बस वही हुआ, जिसके चलते एक मजबूत प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा ।”
बात को आगे बढ़ाते हुए बाबाजी बोले, “वत्स! जब निकाय चुनाव में सभापति की सीट सामान्य घोषित हुई, तभी से ‘भानजी’ भारी तनाव में थे। उन्हें पूरा भरोसा था कि बोर्ड तो बना लेंगे, लेकिन सभापति की कुर्सी के सियासी कांटों पर उन्हें कई गतिरोधों का सामना करना पड़ेगा। बस फिर क्या था, उन्होंने खुद को सुरक्षा घेरे में लेते हुए रातों-रात शहर की गलियों के समीकरण ऐसे उलझाए कि अपने इस रण को फतह कर ही लिया।”
“बाबाजी…”
बाबाजी ने हाथ का इशारा करते हुए मुझे बीच में ही रोक दिया, “रुको वत्स! एक बड़े गतिरोध की ओर से आने वाले समय में कुछ बहुत बड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं।”
मैंने तुरंत तारीख टटोली और पूछा, “बाबाजी, आज गणेश चतुर्थी है और कुछ खास लोगों के लिए ‘गज केसरी योग’ भी बना हुआ है, क्या ऐसे में वे भारी पड़ेंगे?”
बाबाजी ठहाका लगाकर बोले, “बेटा वत्स! भानजी के इस किले में बड़े-बड़े सपने देखने की सख्त मनाही है। और हां, एक बात और बहुत गौर करने वाली है वह 44 का आंकड़ा! जहां-जहां पान का बीड़ा, काला चश्मा और… के चरण पड़े, वहां एक नया ही इतिहास रचा गया । वार्ड 44 में ठीक 44 वोट और वार्ड 53 में भी ठीक 44 ही वोट निर्दलीय को मिल पाए…”
“बाबाजी, आखिर क्या रहस्य है इस 44 के आंकड़े में ?” मेरी उत्सुकता सातवें आसमान पर थी ।
“वत्स… रुको, सब एक साथ मत पूछो!” बाबाजी ने अपनी मूंछों को ताव देते हुए कहा, “भान की कुंडली देखकर मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि तुम्हारे शहर का यह ‘चन्द्रमा’ अब रुकने वाला नहीं है; किसी में दम हो तो रोक कर दिखा दे! भानजी ने अपना किला बचाते हुए अपनी ही पार्टी के भीतरघातियों को करारा जवाब तो दिया ही है, साथ ही शीर्ष नेतृत्व और सरकार को भी जता दिया है कि भान के बगैर अब पत्ता भी नहीं हिल सकता। वत्स… अभी तो भानजी को जीत का आनंद लेने दो !”
राजनीति के इस चौसर पर प्यादों की चालें अभी और बहुत कुछ दिखाएंगी, क्योंकि कुर्सी का असली खेल तो शपथ ग्रहण के बाद शुरू होगा। तब तक के लिए… खेल जारी है !
निम्बाहेड़ा में भाजपा 27 वही कांग्रेस 17 और 1 निर्दलीय नें बाजी मारी है । आकोला में कांग्रेस 12 भाजपा 7और 1 निर्दलीय नें बाजी मारी है बड़ीसादड़ी में कांग्रेस 13 भाजपा 12 और नें बाजी मारी है कपासन में कांग्रेस 13 भाजपा 10 और 2 निर्दलीय नें बाजी मारी है रावतभाटा में भाजपा 17 ,कांग्रेस 16 और 7 निर्दलीयों नें बाजी मारकर किला फतह किया है । बेंगू में भाजपा 24 ,कांग्रेस 8 और 3 निर्दलीयों नें बाजी मारी ।